हीलियम दुनिया का नया हल्का सोना | MRI मशीन से लेकर दुनिया की भविष्य की टेक्नोलॉजी तक | जानिए क्यों मची है हीलियम की होड़: Helium New gold of world

Helium New gold of world: जानिए हीलियम क्या है, MRI मशीन में इसका उपयोग क्यों होता है, सुपरकंडक्टिविटी, चिप निर्माण, क्वांटम टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष तकनीक में हीलियम की भूमिका क्या है। पढ़ें पूरी जानकारी।

 

जय हिन्द, आप में से कितने लोगों को ये बात पता है कि MRI मशीन को कभी बंद नहीं कर सकते हैं। अगर MRI मशीन बंद कर दी तो 30 लाख रुपये से 40 लाख रुपए तक खर्चा आ सकता है। इसका रीजन क्या है? इसका रीजन है वो गैस जिसको आज के टाइम में सोना कहा जा रहा है। हल्का इसलिए कहते हैं कि दुनिया की दूसरी सबसे हल्की गैस यही है। आज हम बात करने वाले हैं हिलियम की। Read more – e20 petrol mileage drop

हीलियम क्या है? :-

हिलियम वो गैस है, एक समय था जब हीलियम केवल आवर्त सारणी (Periodic Table) के 18वें समूह की एक निष्क्रिय (Inert) गैस के रूप में पढ़ाई जाती थी, लेकिन आज यही गैस अखबारों की सुर्खियां बन रही है। हिलियम को inert गैस कहा करते थे, inert का मतलब जो किसी से reaction नहीं करती। आज हिलियम अखबारों के अंदर headline बन रहा है। ऐसा कहा जा रहा है, जिसके पास हिलियम होगा, उसका future पे कब्जा होगा।
हिलियम एक ऐसी गैस है दुनिया में, जिसको science नहीं बना सकता, nature बनाती है, उसका नाम है हिलियम। अब हिलियम जो है, उसको हल्का सोना (Helium New gold of world ) कहते हैं, सबसे पहली चीज़, हिलियम जो है, ये एक गैस होती है। अब गैस दो तरह की हो सकती है – एक वो जो रियक्शन करे, एक वो जो किसी से रियक्शन ना करे। क्योंकि हिलियम किसी से रियक्शन नहीं करती, इसलिए हिलियम को इनर्ट गैस कहते हैं, इनर्ट गैस का मतलब जो जल्दी से रियक्शन नहीं देती।

हीलियम नाम कैसे पड़ा? :-

अब बात आती है कि हिलियम नाम कहां से आया, बड़ा इंट्रेस्टिंग किस्सा है, हिलियम की स्टडी सबसे पहले अर्थ की बजाए सूरज पर है धरती के उपर तो हिलियम है ही नहीं, environment के अंदर, atmosphere के अंदर हिलियम नहीं मिलने वाली है।
क्योंकि यहां तो हिलियम अगर बाहर आ गई तो उड़ जाती है, स्पेस में उड़ जाती है, ग्रेविटी उसको रोक ही नहीं पाती, इतनी हल्की है हिलियम, तो हिलियम शब्द, हिलियोस से बना। सूरज को इंग्लिश में, ग्रीक लेंग्वेज में हिलियोस कहा जाता है, जब वैज्ञानिक सूरज की स्टडी कर रहे थे। उस टाइम उनको पता लगा की सूरज में एक तो हाइड्रोजन है, सूर्य के स्पेक्ट्रम का अध्ययन करते समय उन्हें हाइड्रोजन के अलावा एक और गैस का पता चला, जिसका नाम बाद में हीलियम रखा गया।

पृथ्वी पर हीलियम कैसे बनती है? :-

पृथ्वी के अंदर बड़ी मात्रा में यूरेनियम जैसे रेडियोधर्मी तत्व मौजूद हैं। इनके रेडियोधर्मी विघटन के दौरान अल्फा कण निकलते हैं। अल्फा कण वास्तव में हीलियम के नाभिक के समान होते हैं। समय के साथ यही प्रक्रिया हीलियम गैस के निर्माण का कारण बनती है।
इसी कारण हीलियम प्रकृति द्वारा बनाई जाती है और इसे वैज्ञानिक कृत्रिम रूप से तैयार नहीं कर सकते।

हीलियम इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? :-

इंडिया में 100% हिलियम अपने यहां इंपोर्ट होता है, अब बात करते हैं हिलियम का यूज कहा होगा, तो हीलियम की एक बड़ी जबरदस्त खासियत है, हिलियम की खासियत है कि लिक्विड हीलियम -268 डिग्री सेल्सियस पर रहती है। अगर इसका तापमान थोड़ा सा भी ज़्यादा हो गया, तो ये गैस बदल जाती है, गैस बन जाती है, इसकी तुलना में लिक्विड नाइट्रोजन का तापमान लगभग -196 डिग्री सेल्सियस होता है।
यदि किसी उपकरण को अत्यधिक कम तापमान पर रखना हो तो लिक्विड हीलियम सबसे उपयुक्त माध्यम बन जाती है।

MRI मशीन में हीलियम का क्या काम है? :-

MRI मशीन का पूरा नाम है Magnetic Resonance Imaging, तो MRI मशीन के अंदर बहुत Powerful Electromagnet होती है। Electromagnet का मतलब चुंबक होता है। MRI मशीन में जो Magnetic Field होती है, वो धरती की चुंबक ( गुरूत्वाकर्षण ) से दो लाख गुना Powerful होती है।
इस चुंबक को लगातार कार्य करने के लिए अत्यंत कम तापमान की आवश्यकता होती है। इसके लिए मशीन की कॉइल के चारों ओर लिक्विड हीलियम भरी जाती है।
जब कॉइल का तापमान -268.9 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच जाता है, तब उसमें सुपरकंडक्टिविटी की स्थिति उत्पन्न होती है। इस अवस्था में विद्युत प्रतिरोध लगभग समाप्त हो जाता है और एक बार प्रवाहित किया गया विद्युत प्रवाह लगातार चलता रहता है।
यदि तापमान बढ़ जाए तो लिक्विड हीलियम गैस में बदल जाती है और बाहर निकल सकती है। ऐसी स्थिति में मशीन को दोबारा चालू करने के लिए 30-40 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसलिए MRI मशीन के साथ एक क्रायो कूलर लगातार चलता रहता है, जो हीलियम को ठंडा बनाए रखता है।

सुपरकंडक्टिविटी क्या है? :-

सुपरकंडक्टिविटी वह अवस्था है जिसमें किसी चालक का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है।
जब किसी विद्युत परिपथ को लिक्विड हीलियम जैसे अत्यधिक ठंडे वातावरण में रखा जाता है, तब उसमें विद्युत प्रवाह बिना ऊर्जा हानि के संभव हो जाता है। यही कारण है कि अत्यधिक शक्तिशाली चुंबकीय प्रणालियों में हीलियम का उपयोग किया जाता है। Read more – भारत ने बनाया कुशा S400!

चिप निर्माण में हीलियम का महत्व :-

आज पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक चिप निर्माण की दौड़ में लगी हुई है। किसी भी उन्नत चिप के निर्माण में अत्यधिक नियंत्रित तापमान और विशेष प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है, जहां हीलियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यही कारण है कि हीलियम केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की भी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुकी है।

क्वांटम टेक्नोलॉजी में हीलियम :-

कंप्यूटर आप सभी को पता होगा, अब दुनिया का सबसे पावरफुल कंप्यूटर सुपर कंप्यूटर नहीं है, अब दुनिया का सबसे पावरफुल कंप्यूटर है, क्वांटम प्रोसेसर कम्प्यूटर । भारत भी क्वांटम मिशन पर कार्य कर रहा है। बीस हजार करोड़ रुपये का अलग से बजट का आवंटन करके प्रोजेक्ट क्वांटम मिशन पर लगा है।
क्वांटम प्रोसेसर अत्यंत कम तापमान पर कार्य करते हैं। इसलिए इन्हें भी क्रायोजेनिक तकनीक की आवश्यकता होती है, जहां हीलियम का उपयोग किया जाता है।

अंतरिक्ष तकनीक में हीलियम :-

हीलियम का उपयोग अंतरिक्ष तकनीक में भी किया जाता है। रॉकेट प्रौद्योगिकी, विशेषकर क्रायोजेनिक इंजन में अत्यधिक कम तापमान बनाए रखने के लिए हीलियम की आवश्यकता होती है।
यही कारण है कि अंतरिक्ष अनुसंधान में भी हीलियम एक महत्वपूर्ण गैस मानी जाती है।

हीलियम का उत्पादन करने वाले देश :-

हीलियम का उत्पादन करने वाले देशों को उंगलियों पर गिना जा सकता है। जब इतनी महत्वपूर्ण जगहों पर हीलियम की जरूरत पड़ रही है और भारत में कहीं भी हीलियम का उत्पादन नहीं है। अमेरिका में 44% हीलियम का उत्पादन किया जाता है और कतर में 33% हीलियम का उत्पादन किया जाता है। चीन में भी कुछ प्रतिशत उत्पादन किया जाता है। बाकी अन्य देशों में भी छिट-पुट मात्रा में हीलियम का उत्पादन किया जाता है।

भारत के किस राज्य में हीलियम का उत्पादन होता है? :-

भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में बकेरस (संभावित नाम ) नामक स्थान पर एक झरना है वहां पर हीलियम का कुछ उत्पादन दिखाई पड़ा था। लेकिन सरकार की उदासीनता ने उसे स्थान के महत्व को नहीं समझा। लेकिन आज की जरूरत के अनुसार अब भारत भी ऐसे स्थानों को चिन्हित कर रहा है। जिससे हीलियम का उत्पादन किया जा सके।
आप सभी जानते होंगे हवाई जहाज के टायरों में भी हिलियम गैस भरी जाती है, लेकिन उनको यह नहीं मालूम होता यह गैस कितनी महंगी है। एक टायर में हीलियम भरने के लिए हमें घर आज बेचना पड़ेगा।

चीन ने हीलियम को लेकर चर्चा क्यों बढ़ा दी? :-

दुनिया में हीलियम का बड़ा हिस्सा कुछ ही देशों के पास है। इसी कारण इसकी वैश्विक आपूर्ति हमेशा चर्चा का विषय रहती है।
दिए गए विवरण के अनुसार, चीन ने अपने यहां हीलियम की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। इसका कारण यह बताया गया कि चीन स्वयं बड़े पैमाने पर चिप निर्माण कर रहा है और भविष्य की तकनीकों के लिए उसे हीलियम की आवश्यकता है।
आज AI, सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हीलियम एक महत्वपूर्ण संसाधन बन चुकी है।

हिलियम को लेकर पूरी दुनिया में एकाएक मारामारी क्यों :-

अमेरिका किसी भी देश को चिप बनाने की तकनीक नहीं देना चाहता। जिसके कारण वह चीन सहित अन्य देशों को हीलियम की बड़े पैमाने पर आवश्यकता है और अमेरिका ने सभी देशों को आदेश दिया है कि चीन से किसी भी हालत में हीलियम का व्यापार और चिप तकनीकी का आदान – प्रदान नहीं करना है। हीलियम और चिप तकनीकी का उत्पादन करने वाले देशों पर रोक लगा दी।

भारत को हीलियम की आवश्यकता क्यों पड़ी :-

अब चीन खुद चिप निर्माण के क्षेत्र में आगे आना चाहता है। और भारत भी चिप निर्माण की घोषणा कर चुका है। चिप के निर्माण के लिए चीन को खुद हीलियम की आवश्यकता है इसीलिए चीन ने हीलियम के व्यापार पर रोक लगा दी। भारत चीन से हीलियम खरीदता था। जिससे अब भारत में चिप निर्माण की प्रक्रिया दुविधा में पड़ गई। लेकिन भारत अन्य कई देशों से हीलियम की जरूरत को पूरी करने के लिए बातचीत कर रहा है।

हीलियम की मांग बढ़ने से बढ़ी कीमतें :-

लगभग आज सभी देश जो सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आश्रित होना चाहते हैं वह सभी देश हीलियम को लेकर चिंतित है। सेमीकंडक्टर बनाने के लिए हीलियम की आवश्यकता पड़ेगी। भारत भी सेमीकंडक्टर, गगनयान मिशन , AI और क्वांटम कंप्यूटर बनाने के लिए मजबूत इच्छा शक्ति से आगे बढ़ रहा है। क्योंकि हीलियम का उत्पादन नहीं किया जा सकता है क्योंकि हीलियम स्वत: प्रकृति से पैदा होती है।

निष्कर्ष ( Conclusion ) :-

आज AI, सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हीलियम एक महत्वपूर्ण संसाधन बन चुकी है।
एक समय था जब हीलियम केवल विज्ञान की किताबों तक सीमित थी, लेकिन आज यह चिकित्सा, सुपरकंडक्टिविटी, MRI मशीन, चिप निर्माण, क्वांटम कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष तकनीक जैसी आधुनिक तकनीकों का आधार बन चुकी है।
यही कारण है कि आज हीलियम को “हल्का सोना” कहा जा रहा है। आने वाले समय में तकनीकी विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हीलियम की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है।

 

 

 

 

 

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