Bhasha Aur Adhunikta Class 12th Vyakhya Aur Question Answer : भाषा परिवर्तनशील और हमारे भावना के प्रस्तुतीकरण का माध्यम है। किसी भी क्षेत्र में रमणीयता लाने के लिए हमेशा नूतनता की आवश्यकता होती है। माघ ने कहा है-
भाषा और आधुनिकता
क्षणे क्षणे यन्न्वतामुपैति तदेव रूपं रमणीयतायाः।” अर्थात् ” जो प्रत्येक क्षण नवीनता को प्राप्त हो, वही रमणीयता है या वही सुन्दरता है”।
भाषा का महत्व :-
भाषा को लेकर जब भी हम विचार करते हैं तो, सबसे पहले यही मन में आता है कि यदि भाषा ना होती तो, हम आपस में संवाद कैसे करते। अपनी भावनाओं को कैसे दूसरे के पास पहुंचाते। तब यही से भाषा का महत्व बढ़ जाता है। जिस माध्यम से हम अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। उसे ही भाषा कहते हैं। Read more – Pawan Dutika
भाषा की प्राणशक्ति :-
भाषा की प्राण शक्ति क्या है? जब भी इसको जानने का प्रयास करते हैं। तो हमारे जेहन में एक ही बात आता है कि, “भाषा की प्राण शक्ति व्यवहारिकता है।” ‘भाषा की सबसे छोटी इकाई शब्द है।’ यदि शब्द ना होते तो, भाषा का कोई अस्तित्व नहीं होता।
शब्दों का चयन जितना शुद्ध होगा, भाषा उतनी ही अच्छी मानी जाती है। इसलिए भाषा की प्राण शक्ति व्यवहारिकता ही है।
सांस्कृतिक चेतना और भाषायी परिवर्तन :-
भाषा संस्कृति का एक अटूट अंग है संस्कृति परंपरा से नि:सृत होने पर भी, परिवर्तनशील और गतिशील है। जैसे सड़ी-गली मान्यताओं से जकड़ा हुआ समाज आगे नहीं बढ़ पाता। वैसे ही पुरानी संस्कृतियां और शैलियों की परंपरागत लीक पर चलने वाली संस्कृति भी जन चेतना को गति देने में असमर्थ रह जाती। भाषा समूची युगचेतना की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। जब भाषा अपने युग के अनुकूल सही मुहावरों को ग्रहण कर सके, सामाजिक भाव प्रकटीकरण को सुबोधता के साथ बता सके और अपने अंदर नित्य-प्रतिदिन नए-नए शब्दों का निर्माण करते हुए भाषा अपने में परिवर्तन करती रहे। यही भाषा की आधुनिकता है। यदि भाषा में आधुनिकता का प्रवेश नहीं किया जाएगा तो भाषा का भी विकास संकीर्ण हो जाएगा। नई सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परंपरागत प्रयोग पर्याप्त नहीं है। इसके लिए नए प्रयोग की, नई भाव योजनाओं को व्यक्त करने के लिए नए शब्दों की खोज करना आवश्यक है।
भाषा की आधुनिकता :-
भाषा की आधुनिकता जानने से पहले आधुनिकता क्या है इसके बारे में जानना चाहिए। आधुनिकता शब्द से ही पता चलता है कि वर्तमान समय में चल रही- नित-नूतन-नियम, विज्ञान, नए-नए प्रयोग, तकनीक आदि आधुनिकता के स्वरूप है। इसी तरह भाषा में नए शब्द, नए मुहावरे, नए लोकोक्तियां और नई रीतियों के प्रयोग से युक्त भाषा को व्यवहार में लाना, भाषा में आधुनिकता लाना है। भाषा को नई शैलियों और नूतन प्रणालियों के द्वारा व्यवहार में लाना ही भाषा की आधुनिकता है। क्योंकि व्यवहारिकता ही भाषा का प्राण तत्व है। नए शब्द और नए प्रयोगों का ‘पाठ्य पुस्तकों से लेकर साहित्यिक पुस्तकों तक’ एवं ‘शिक्षित व्यक्तियों से लेकर अशिक्षित व्यक्तियों तक’ के सभी कार्यकलापों में प्रयुक्त होना आवश्यक है। हम अपनी भाषा को अपने जीवन की सभी आवश्यकताओं के लिए जब प्रयुक्त कर सकेंगे, तब भाषा में अपने आप आधुनिकता आ जाएगी।
भाषा और आधुनिकता के गद्यांश आधारित प्रश्न उत्तर :-
(गंद्याश -1)
भाषा संस्कृति का एक अटूट अंग है। संस्कृति परम्परा से निःसृत होने पर भी, परिवर्तनशील और गतिशील है। उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उद्भूत नई सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परम्परागत प्रयोग पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए नए प्रयोगों की, नई भाव-योजनाओं को व्यक्त करने के लिए नए शब्दों की खोज की महती आवश्यकता है। Read more – ऋतुवर्णनम्
क) पाठ के शीर्षक का नाम लिखिए।
उत्तर – भाषा और आधुनिकता।
ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – संस्कृति परम्परा से उत्पन्न होने पर भी, परिवर्तनशील और गतिशील है। भाषा की गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है।
(ग) नए शब्दों की खोज क्यों आवश्यक है?
उत्तर – नए भाव और योजनाओं को व्यक्त करने के लिए नए शब्दों की खोज की आवश्यकता है।
(घ) संस्कृति का एक अटूट अंग क्या है?
उत्तर – भाषा।
(ङ) किसके लिए भाषा के परम्परागत प्रयोग पर्याप्त नहीं हैं?
उत्तर – नई सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परम्परागत प्रयोग पर्याप्त नहीं हैं।
(गंद्याश -2)
भाषा की साधारण इकाई शब्द है, शब्द के अभाव में भाषा का अस्तित्व ही दुरूह है। यदि भाषा में विकसनशीलता शुरू होती है तो शब्दों के स्तर पर ही। दैनंदिन सामाजिक व्यवहारों में हम कई ऐसे नवीन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जो अंग्रेजी, अरबी, फारसी आदि विदेशी भाषाओं से उधार लिये गए हैं। वैसे ही नए शब्दों का गठन भी अनजाने में अनायास ही होता है। ये शब्द, अर्थात् उन विदेशी भाषाओं से सीधे अविकृत ढंग से उधार लिये गए शब्द, भले ही कामचलाऊ माध्यम से प्रयुक्त हों, साहित्यिक दायरे में कदापि ग्रहणीय नहीं। यदि ग्रहण करना पड़े तो उन्हें भाषा की मूल प्रकृति के अनुरूप साहित्यिक शुद्धता प्रदान करनी पड़ती है। यहाँ प्रयत्न की आवश्यकता प्रतीत होती है।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर – प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ पुस्तक हिंदी के गद्य भाग में निहित ‘भाषा और आधुनिकता‘ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक ‘प्रो• जी सुंदर रेड्डी‘ है।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – भाषा की साधारण इकाई शब्द है, शब्द के अभाव में भाषा का अस्तित्व बचा पाना कठिन है। यदि भाषा में विकास की परंपरा शुरू होती है तो शब्दों के स्तर पर ही विकास होता है। दैनिक जीवन के सामाजिक व्यवहारों में हम कई ऐसे नवीन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।
(ग) भाषा की साधारण इकाई क्या है?
उत्तर – भाषा की साधारण इकाई शब्द है।
(घ) दैनिक व्यवहार में हम किन शब्दों के प्रयोग करते हैं?
उत्तर – विदेशी भाषाओं से और अविकृत उधार लिये गए हैं।
(ङ) ‘दैनंदिन’ एवं ‘अविकृत’ का अर्थ लिखिए।
उत्तर – दैनंदिन – दैनिक व्यवहार में। अविकृत – जिसमें विकार न हुआ हो।
(गंद्याश -3)
रमणीयता और नित्य नूतनता अन्योन्याश्रित हैं, रमणीयता के अभाव में कोई भी चीज मान्य नहीं होती। नित्य नूतनता किसी भी सर्जक की मौलिक उपलब्धि की प्रामाणिकता सूचित करती है और उसकी अनुपस्थिति में कोई भी चीज वस्तुतः जनता व समाज के द्वारा स्वीकार्य नहीं होती। ‘सड़ी-गली मान्यताओं से जकड़ा हुआ समाज जैसे आगे बढ़ नहीं पाता, वैसे ही पुरानी रीतियों और शैलियों की परम्परागत लीक पर चलनेवाली भाषा भी जनचेतना को गति देने में प्रायः असमर्थ ही रह जाती है।’
(क) उपर्युक्त गद्य के अंश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर – पूर्ववत्।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – सड़ी-गली पूरानी मान्यताओं से जकड़ा हुआ समाज जैसे आगे बढ़ नहीं पाता। वैसे ही पुरानी रीतियों और शैलियों की परम्परागत लीक पर चलनेवाली भाषा भी जन की चेतना को गति देने में प्रायः असमर्थ ही रह जाती है।
(ग) रमणीयता और नूतनता में प्रत्यय हैं?
उत्तर – रमणीयता और नूतनता में (ता) प्रत्यय हैं।
(घ) प्रस्तुत गद्यांश के अनुसार नित्य नूतनता किसे सूचित करती है?
उत्तर – सर्जक की मौलिक उपलब्धि की प्रामाणिकता सूचित करती है ।
(ङ) जनचेतना को गति देने का माध्यम है?
उत्तर – भाषा।
FAQ :-
Q.भाषा का प्राण तत्व क्या है?
Ans. भाषा का प्राण तत्व व्यवहारिकता है।
Q.भाषा और आधुनिकता क्या है?
Ans.भाषा और आधुनिकता का संबंध संस्कृति और विचारधाराओं का परिवर्तन है।
Q.भाषा और आधुनिकता के लेखक कौन थे?
Ans.प्रो• जी सुंदर रेड्डी।
Q.भाषा का आधुनिकीकरण क्या है?
Ans. वर्तमान समय के अनुसार भाषा को आधुनिक बनाना। भाषा का आधुनिकीकरण कहलाता है।