UP Anudeshak Supreme Court Verdict Honorarium will now: UP Basic School Anudeshak Supreme Court Honorarium: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज की। अनुदेशकों को ₹17,000 मानदेय और 2017-18 से एरियर का रास्ता साफ।
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हजारों अंशकालिक अनुदेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही 4 फरवरी 2026 को अनुदेशकों के पक्ष में दिया गया फैसला अब पूरी तरह अंतिम हो गया है। इस निर्णय से अनुदेशकों को ₹17,000 प्रति माह मानदेय के साथ वर्ष 2017-18 से लंबित एरियर मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है।
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कब और कहां से शुरू हुआ था पूरा मामला? :-
उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों को कई वर्षों से बेहद कम मानदेय दिया जा रहा था। इसे लेकर अनुदेशकों ने लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ी। अनुराग एवं अन्य की ओर से यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां सिविल अपील संख्या 759-764/2026 के तहत सुनवाई हुई।
लेकिन यह विवाद केवल मानदेय बढ़ाने तक सीमित नहीं था, बल्कि अनुदेशकों के सम्मानजनक जीवन और उचित पारिश्रमिक के अधिकार से भी जुड़ा हुआ था। हाईकोर्ट से होते हुए यह मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अनुदेशकों को राहत मिली।
4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया था? :-
सुप्रीम कोर्ट ने 4 फरवरी 2026 को अनुदेशकों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा कि अनुदेशकों को ₹17,000 प्रति माह से कम मानदेय देना संविधान के अनुच्छेद 23 (शोषण के विरुद्ध अधिकार) के विपरीत है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि –
- अनुदेशकों का मासिक मानदेय ₹17,000 किया जाए।
- वर्ष 2017-18 से लेकर फैसले की तारीख तक का पूरा बकाया एरियर दिया जाए।
- यह भुगतान फैसले के छह माह के भीतर पूरा किया जाए।
सरकार ने पहले आदेश लागू किया, फिर दायर की रिव्यू पिटीशन :-
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 अप्रैल 2026 की कैबिनेट बैठक में अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर ₹17,000 प्रति माह करने को मंजूरी दे दी। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू भी कर दी गईं।
हालांकि, इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। सरकार ने ओपन कोर्ट में व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing) की भी मांग की थी। माना जा रहा था कि सरकार विशेष रूप से एरियर संबंधी आदेश में राहत चाहती थी।
अनुदेशक कौन हैं और उनकी क्या भूमिका है? :-
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा 6 से 8) में वर्ष 2013 के आसपास विभिन्न विषयों के लिए अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति की गई थी। इन अनुदेशकों को मुख्य रूप से कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा तथा कार्य शिक्षा जैसे विषयों का शिक्षण कार्य सौंपा गया। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को नियमित पाठ्यक्रम के साथ-साथ व्यावहारिक, रचनात्मक और कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। sdgclasses.com
राज्यभर के हजारों उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत ये अनुदेशक वर्षों से शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। हालांकि, लंबे समय तक इन्हें नियमित शिक्षकों की तुलना में बेहद कम मानदेय पर कार्य करना पड़ा, जबकि वे विद्यालयों में निर्धारित समय के अनुसार अपनी सेवाएं देते रहे। इसी कम मानदेय को लेकर अनुदेशकों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और कई वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी।
सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में माना कि लंबे समय तक अत्यंत कम मानदेय पर कार्य कराना उचित नहीं है। इसी आधार पर न्यायालय ने अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर ₹17,000 प्रति माह करने तथा वर्ष 2017-18 से बकाया एरियर का भुगतान करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज किए जाने के बाद अब यह फैसला अंतिम रूप से लागू होने का रास्ता साफ हो गया है।
23 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दिया नया आदेश :-
23 जुलाई 2026 को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने राज्य सरकार की रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि –
- व्यक्तिगत सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की जाती।
- रिव्यू पिटीशन में ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे 4 फरवरी 2026 के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।
- सभी रिव्यू पिटीशन खारिज की जाती हैं।
- मामले से जुड़ी सभी लंबित अर्जियों का भी निस्तारण किया जाता है।
- इस फैसले के साथ ही फरवरी 2026 का निर्णय पूरी तरह अंतिम हो गया है।
अब बेसिक शिक्षक अनुदेशकों को क्या मिलेगा? :-
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब अनुदेशकों को निम्नलिखित लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है:
- ₹17,000 प्रति माह मानदेय।
- वर्ष 2017-18 से अब तक का पूरा बकाया एरियर।
- सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का लाभ बिना किसी कानूनी बाधा के मिलने की संभावना।
- जिन अनुदेशकों को अभी तक एरियर का भुगतान नहीं मिला है, उनके लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है।
अनुदेशकों को एरियर कितना मिल सकता है? :-
अनुमान के अनुसार, यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार वर्ष 2017-18 से एरियर का भुगतान किया जाता है, तो पात्र अनुदेशकों को सेवा अवधि और अन्य परिस्थितियों के आधार पर लगभग ₹7 लाख से ₹8 लाख तक का एरियर मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक राशि प्रत्येक अनुदेशक के सेवा रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और सरकारी गणना के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
Conclusion ( निष्कर्ष ) –
सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज किए जाने के बाद अनुदेशकों की वर्षों पुरानी कानूनी लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अब फरवरी 2026 का फैसला अंतिम रूप से लागू माना जाएगा। ऐसे में अनुदेशकों को न केवल ₹17,000 मासिक मानदेय मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, बल्कि वर्ष 2017-18 से लंबित एरियर प्राप्त होने की उम्मीद भी मजबूत हो गई है। अब सभी की नजर राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन और एरियर भुगतान की प्रक्रिया पर रहेगी।