Ham Aur Hamara Aadarsh ke Questions Answer: हम और हमारा आदर्श गद्यांश आधारित प्रश्न उत्तर

Ham Aur Hamara Aadarsh ke Questions Answer : प्रस्तुत पाठ ‘हम और हमारा आदर्श‘ डॉ० ए०पी० जे० अब्दुल कलाम की मूल पुस्तक ‘इग्नाइटिड माइण्ड्स‘ के हिन्दी अनुवाद ‘तेजस्वी मन’ का सम्पादित अंश है। राष्ट्र को विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में लाने के लिए मानव को अपनी ऊर्जा का अधिकाधिक एवं श्रेष्ठतम प्रयोग करना चाहिए।

Ham Aur Hamara Aadarsh ke Questions Answer

हम और हमारा आदर्श पाठ का सारांश :-

युवाओं के प्रति अटूट विश्वास और समृद्धि का मार्ग :-

मैं खासतौर से युवा छात्रों से ही क्यों मिलता हूँ? युवाओं से इसलिए जुड़ते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं में आत्मविश्वास और आत्मस्वालम्बन होना अनिवार्य है। वे स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि, भौतिक समृद्धि और आध्यात्मिकता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। प्रकृति का उदाहरण देते हुए वे बताते हैं कि ईश्वर की दी हुई अच्छी चीजों को पाने की इच्छा रखना थोड़ा सा भी गलत नहीं है, क्योंकि उत्थान और समृद्धि ही राष्ट्र को सुरक्षा और स्वतंत्रता प्रदान करती है।

न्यूनतम में गुजारा करने और जीवन बिताने में भी निश्चित रूप से कोई हर्ज नहीं है। महात्मा गांधी ने ऐसा ही जीवन जिया था, लेकिन जैसा कि उनके साथ था, आपके मामले में भी यह आपकी पसन्द पर निर्भर करता है। आपकी ऐसी जीवन-शैली इसलिए है; क्योंकि इससे वे तमाम जरूरतें पूरी होती हैं, जो आपके भीतर की गहराइयों से उपजी होती हैं। लेकिन त्याग की प्रतिमूर्ति बनना और जोर-जबरदस्ती से चुनना, सहने का गुणगान करना; अलग बातें हैं। Read more – भाषा और आधुनिकता

हमारी युवा शक्ति से सम्पर्क कायम करने के मेरे फैसले का आधार भी यही रहा है। उनके सपनों को जानना और उन्हें बताना कि अच्छे, भरे-पूरे और सुख-सुविधाओं से पूर्ण जीवन के सपने देखना तथा फिर उस स्वर्णिम युग के लिए काम करना सही है। आप जो कुछ भी करें, वह आपके हृदय से किया गया हो, अपनी आत्मा को अभिव्यक्ति दें और इस तरह आप अपने आस-पास प्यार तथा खुशियों का प्रसार कर सकेंगे।
आत्मा और पदार्थ दोनों एक ही ऊर्जा के रूप हैं। अतः सुख-सुविधाओं की आकांक्षा रखना शर्मनाक नहीं है। वे त्याग और सादगी को व्यक्तिगत चुनाव मानते हैं, न कि किसी पर थोपी गई मजबूरी। अंत में, वे युवाओं को संदेश देते हैं कि वे एक स्वर्णिम और समृद्ध जीवन का सपना देखें और पूरे हृदय से उसे प्राप्त करने का प्रयास करें, ताकि वे समाज में खुशियाँ फैला सकें।

 

भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति डॉक्टर अब्दुल कलाम का संक्षिप्त जीवन परिचय :-

  • नाम – डॉ० ए०पी० जे० अब्दुल कलाम।
  • पिता का नाम – जैनुलाबदीन।
  • जीवनकाल – सन् 1931-2015 ई0।         
  • जन्म-स्थान – धनुषकोडी, रामेश्वरम्।
  • शिक्षा – इंजीनियरिंग।
  • लेखन-विधा –काव्य, आत्मकथा, विज्ञान।
  • भाषा-शैली –भाषा-सरल, प्रवाहमय, बोधगम्य। शैली-चिन्तनपरक, आत्मकथात्मक।
  • प्रमुख रचनाएँ — इग्नाटिड माइंड्स : अनलीशिंग, द पावर विदिन इण्डिया, माय जर्नी आदि।
  • मृत्यु – सन् 2015 ई0।

 

हम और हमारा आदर्श गद्यांश आधारित प्रश्न उत्तर :- 

गंद्याश-1

आखिर वह क्या था; जिसके कारण यह सम्भव हो सका? महत्त्वाकांक्षा? कई बातें मेरे दिमाग में आती हैं। मेरा ख्याल है कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि मैंने अपने योगदान के मुताबिक ही अपना मूल्य आँका। बुनियादी बात जो आपको समझनी चाहिए, वह यह है कि आप जीवन की अच्छी चीजों को पाने का हक रखते हैं, उनका जो ईश्वर की दी हुई हैं। जब तक हमारे विद्यार्थियों और युवाओं को यह भरोसा नहीं होगा कि वे विकसित भारत के नागरिक बनने के योग्य हैं, तब तक वे जिम्मेदार और ज्ञानवान् नागरिक भी कैसे बन सकेंगे। Read more – पंचशील सिद्धांता 

 

प्रश्न- (क) प्रस्तुत गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के गद्य भाग में निहित ‘हम और हमारा आदर्श‘ नामक पाठ सेलिया गया है इसके लेखक ‘डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जी’ है।

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर – लेखक कहता है, जब भी मेरे दिमाग में बात आती है तो, मेरा सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि, मैं अपने योगदान के मुताबिक अपना मूल्य समझा। बुनियादी बात जो सभी को समझनी चाहिए वह यह है, कि प्रकृति द्वारा दी गई वस्तुओं को सबको पाने का हक है।

(ग) गंद्याश के अनुसार मानव की उसकी सफलता के पीछे सबसे महत्त्वपूर्ण बात क्या रही?
उत्तर – मैंने अपने योगदान के मुताबिक ही अपना मूल्य आँका।

(घ) प्रस्तुत गद्यांश में युवा छात्रों को कौन-सी बुनियादी बात समझने को कहते हैं?
उत्तर – जीवन में अच्छी चीजों को पाने का हक, जो ईश्वर द्वारा दी गई है।

(ङ) युवा छात्र जिम्मेदार और ज्ञानवान् नागरिक कब तक नहीं बन सकेंगे?
उत्तर – जबतक युवाओं को यह भरोसा नहीं होगा कि वे विकसित भारत के नागरिक बनने के योग्य हैं।

गंद्याश-2

2. विकसित देशों की समृद्धि के पीछे कोई रहस्य नहीं छिपा है। ऐतिहासिक तथ्य बस इतना है कि इन राष्ट्रों- जिन्हें जी-8 के नाम से पुकारा जाता है के लोगों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस विश्वास को पुख्ता किया कि मजबूत और समृद्ध देश में उन्हें अच्छा जीवन बिताना है। तब सच्चाई उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप ढल गई।

 

प्रश्न- (क) गद्यांश के लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर – डा• एपीजे अब्दुल कलाम जी’।

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर – लेखक कहते हैं- विकसित राष्ट्र के पीछे कोई नया रहस्य नहीं है। इन राष्ट्रों को जी 8 नाम से पुकारा जाता है। क्योंकि इस पीढ़ी के लोगों ने विश्वास को मजबूत किया और मजबूत समृद्ध देश में उन्हें अच्छा जीवन बिताना है, इस लक्ष्य के साथ उन्होंने अपने राष्ट्र को विकसित बनाया।

(ग) किन देशों की समृद्धि के पीछे कोई रहस्य नहीं छिपा है?
उत्तर – विकसित देशों की समृद्धि के पीछे कोई रहस्य नहीं छिपा है।

(घ) G-8 के नाम से किन देशों को पुकारा जाता है?’
उत्तर – विकसित देशों को G-8 के नाम से पुकारा जाता है।

(ङ) G-8 के देशों के लोगों ने किस विश्वास को मजबूत किया?
उत्तर – G-8 देशों के लोगों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस विश्वास को पुख्ता किया कि मजबूत और समृद्ध देश में उन्हें अच्छा जीवन बिताना है।

गंद्याश-3

3. मैं यह नहीं मानता कि समृद्धि और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी हैं या भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत सोच है। उदाहरण के तौर पर, मैं खुद न्यूनतम वस्तुओं का भोग करते हुए जीवन बिता रहा हूँ, लेकिन मैं सर्वत्र समृद्धि की कद्र करता हूँ; क्योंकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है, जो अन्ततः हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक हैं। आप अपने आस-पास देखेंगे तो पाएँगे कि खुद प्रकृति भी कोई काम आधे-अधूरे मन से नहीं करती। किसी बगीचे में जाइए। मौसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी अथवा ऊपर की तरफ ही देखें, यह ब्रह्माण्ड आपके अनन्त तक फैला दिखाई देगा, आपके यकीन से भी परे।

प्रश्न- (क) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर – पूर्ववत्।

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर – लेखककार का मत है समृद्धि और अध्यात्म एक दूसरे के विरोधी नहीं है। बल्कि भौतिक वस्तुओं की चाह रखना गलत सोच है।जैसे न्यूनतम वस्तुओं का भोग करते हुए जीवन व्यतीत करना सर्वत्र समृद्धि का कद्र करना है। क्योंकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा और विश्वास लाती है, और हमें आजादी को बनाए रखने में सहायक होती है। आप देखते होंगे प्रकृति खुद भी कोई काम आधे अधूरे मन से नहीं करती है।

(ग) कौन एक-दूसरे का विरोधी नहीं है?
उत्तर – समृद्धि और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।

(घ) समृद्धि अपने साथ क्या – क्या लाती है?
उत्तर – समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है।

(ङ) समृद्धि अन्ततः किसे बनाए रखने में सहायक है?
उत्तर -समृद्धि हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक हैं।

गंद्याश-4

4. जो कुछ भी हम इस संसार में देखते हैं, वह ऊर्जा का ही स्वरूप है। जैसा कि महर्षि अरविन्द ने कहा है कि हम भी ऊर्जा के ही अंश हैं। इसलिए जब हमने यह जान लिया है कि आत्मा और पदार्थ; दोनों ही अस्तित्व का हिस्सा हैं, वे एक-दूसरे से पूरा तादात्म्य रखे हुए हैं, तो हमें यह एहसास भी होगा कि भौतिक पदार्थों की इच्छा रखना किसी भी दृष्टिकोण से शर्मनाक या गैर-आध्यात्मिक बात नहीं है।

प्रश्न- (क) गद्यांश के पाठ का नाम लिखिए।
उत्तर – हम और हमारा आदर्श।

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर – आत्मा और पदार्थ; दोनों ही अस्तित्व का हिस्सा हैं, और हम भी ऊर्जा के ही अंश हैं। भौतिक पदार्थों की इच्छा रखना किसी भी दृष्टिकोण से शर्मनाक या गैर-आध्यात्मिक बात नहीं है। इसलिए एक दूसरे से पूरा तादात्म्य रखना चाहिए।

(ग) हम इस संसार में जो कुछ भी देखते हैं, उसका स्वरूप किसका है?
उत्तर – हम इस संसार में जो कुछ भी देखते हैं, उसका स्वरूप ऊर्जा का है।

(घ) गंद्याश के अनुसार महर्षि अरविन्द ने क्या कहा?
उत्तर – आत्मा और पदार्थ; दोनों ही अस्तित्व का हिस्सा हैं, और हम भी ऊर्जा के ही अंश हैं।

(ड़) गंद्याशानुसार शर्मनाक या गैर-आध्यात्मिक बात कौन-सी नहीं है?
उत्तर – भौतिक पदार्थों की इच्छा रखना किसी भी दृष्टिकोण से शर्मनाक या गैर-आध्यात्मिक बात नहीं है।

Ham aur hamara aadarsh nibandh ke lekhak kon hai :-

गंद्याश-5

5. न्यूनतम में गुजारा करने और जीवन बिताने में भी निश्चित रूप से कोई हर्ज नहीं है। महात्मा गांधी ने ऐसा ही जीवन जिया था, लेकिन जैसा कि उनके साथ था, आपके मामले में भी यह आपकी पसन्द पर निर्भर करता है। आपकी ऐसी जीवन-शैली इसलिए है; क्योंकि इससे वे तमाम जरूरतें पूरी होती हैं, जो आपके भीतर की गहराइयों से उपजी होती हैं। लेकिन त्याग की प्रतिमूर्ति बनना और जोर-जबरदस्ती से चुनना, सहने का गुणगान करना; अलग बातें हैं।

प्रश्न- (क) प्रस्तुत गद्यांश के लेखक और पाठ का नाम लिखिए।
उत्तर – डॉ० ए०पी० जे० अब्दुल कलाम जी’ और हम और हमारा आदर्श।

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर – न्यूनतम में गुजारा करने और जीवन बिताने में भी निश्चित रूप से कोई हर्ज नहीं है। महात्मा गांधी ने ऐसा ही जीवन जिया था। लेकिन हमारा जीवन जीने का अंदाज अलग है।

(ग) उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार मनुष्य को सदैव किस प्रकार की जीवन-शैली अपनानी चाहिए?
उत्तर -मनुष्य को सदैव न्यूनतम में गुजारा करने की और हृदय की गहराइयों से उपजी जीवन-शैली अपनानी चाहिए।

(घ) गंद्याश के अनुसार किस प्रकार का जीवन व्यतीत करने में परेशानी नहीं है?
उत्तर – अपनी पसंद के अनुसार जीवन व्यतीत करने में, जो तमाम जरूरत को पूरा करें ऐसे जीवन को जीने में परेशानी नहीं है।

(ङ) किसे एक-दूसरे का विरोध नहीं मानते हैं?
उत्तर – त्याग की प्रतिमूर्ति बनकर जीना और अपनी पसंद के अनुसार जीवन व्यतीत करना एक दूसरे का विरोध नहीं मानते हैं।

गंद्याश-6

6. उनके सपनों को जानना और उन्हें बताना कि अच्छे, भरे-पूरे और सुख-सुविधाओं से पूर्ण जीवन के सपने देखना तथा फिर उस स्वर्णिम युग के लिए काम करना सही है। आप जो कुछ भी करें, वह आपके हृदय से किया गया हो, अपनी आत्मा को अभिव्यक्ति दें और इस तरह आप अपने आस-पास प्यार तथा खुशियों का प्रसार कर सकेंगे।

प्रश्न (क) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर – पूर्ववत्।

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर – युवाओं के सपनों को जान करके, उनके जीवन के सुख सुविधाओं का विस्तार करते हुए, एक स्वर्णिम युग की कल्पना करना चाहिए।

(ग) गद्यांश के अनुसार युवा शक्ति से सम्पर्क कायम करने के फैसले का आधार क्या रहा है?
उत्तर – युवाओं के सपनों के बारे में जानना और जान करके स्वर्णिम युग के लिए काम करना।

(घ) उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार शब्दों में स्वर्णिम युग के लिए कार्य करना कब सही है?
उत्तर – अच्छे, भरे-पूरे और सुख-सुविधाओं से पूर्ण जीवन के सपने को देखकर।

(ङ) गंद्याश के अनुसार हम अपने आस-पास प्यार तथा खुशियों का प्रसार कब कर सकेंगे?
उत्तर – जब कार्य आपके हृदय से किया गया हो, और जब अपनी आत्मा को अभिव्यक्ति दें सकेंगे।

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