भोजस्यौदार्यम् गद्यांश और पद्यांश की सरल व्याख्या

Bhojasyodaryam

भोजस्यौदार्यम् गद्यांश और पद्यांश की सरल व्याख्या : उपर्युक्त शीर्षक भोजस्यौदार्यम् ( Bhojasyodaryam ) कक्षा 12 के संस्कृत खण्ड से लिया गया है। इसमें राजा भोज की उदारता, दानशीलता, कवियों के प्रति सम्मान, विद्वानजनों को अपनी सभाओं में सम्मान देते थे, बतलाया गया है। राजा भोज का शासन काल लगभग ( 1010 से 1055 ) … Read more

नौका विहार कविता की सरल और स्पष्ट व्याख्या

Nauka Vihar

नौका विहार कविता की सरल और स्पष्ट व्याख्या: कवि सुमित्रानंदन पंत Nauka Vihar में भावनाओं के सागर में मदमस्त होकर गंगा की जल धारा के समान जीवन की गति है। जैसे गंगा पहाड़ीयों से निकलकर धरती को पुष्पित करते हुए’ समुद्र में विलीन हो जाती है । उसी तरह मानव जीवन भी जन्म लेकर और … Read more

Kaikeyi Ka Anutap मां के पुत्रमोह में लिए गए फैसले पर अद्भुत पश्चात्ताप

Kaikeyi ka Anutap

Kaikeyi Ka Anutap मां के पुत्रमोह में लिए गए फैसले पर अद्भुत पश्चात्ताप: कैकेयी हाथ जोड़कर सभा के बीच में खड़ी हैं और अपने किए गए कर्मों के लिए सबसे क्षमा मांग रही हैं। वह kaikeyi ka Anutap नामक पाठ के काव्य में स्वीकार करती हैं कि उनके कारण ही ये सारी विपत्तियाँ आईं और … Read more

Pururava: पुरूरवा का प्रेम प्रस्ताव- मर्त्य मानव की विजय का तूर्य हूं मैं, उर्वशी! अपने समय का सूर्य हूं मै

Pururava

रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित ‘उर्वशी’ काव्य ग्रंथ के ‘पुरूरवा उर्वशी नामक संवाद’ से लिया गया है । Pururava असीम शक्ति के बावजूद उर्वशी के प्रति अपनी एक अज्ञात बंधन, अपनी वेदना, प्रेम रूपी प्यास और अपनी असहाय स्थिति को प्रकट करता है। जबकि उर्वशी उसे एक भ्रम मानकर अपने अलौकिक शक्ति और नारी सौंदर्य … Read more

यमुना छवि की व्याख्या क्लास 12

Yamuna chhavi

यमुना छवि की व्याख्या क्लास 12: पद्यांश क्लास 12 के हिन्दी पाठ्य पुस्तक के Yamuna Chhavi नामक पाठ से लिया गया है। जिसके रचयिता भारतेंदु हरिश्चंद्र जी है, यह काव्य उनकी ‘चंद्रावली नाटिका से’ लिया गया है। इस काव्य में यमुना नदी के प्राकृतिक सौंदर्य तथा उनके किनारे खड़े तमाल के वृक्ष और श्री कृष्ण … Read more

गंगावतरण की सरल व्याख्या : गंगा का पृथ्वी पर आगमन

गंगावतरण की सरल व्याख्या

गंगावतरण की सरल व्याख्या: “Gangavataran” नामक शीर्षक से रचित खंडकाव्य ‘जगन्नाथ दास रत्नाकर जी’ ने सगर-पुत्रों के उद्धार के लिए महाराजा ‘भागीरथ’ की तपस्या के परिणाम स्वरूप गंगा के पृथ्वी पर आगमन का सुंदर वर्णन किया है निम्नलिखित छंदों में गंगा के आकाश से पृथ्वी की ओर तीव्र गति से आने एवं शिवजी की जटाओं … Read more

प्रेम माधुरी की सरल व्याख्या : प्रेम के मीठेपन की यथार्थ व्यंजना

प्रेम माधुरी की सरल व्याख्या

प्रेम माधुरी की सरल व्याख्या: प्रेम के मार्ग को किसको किसको समझाएं, जिसको प्रेम होता है वहीं इसकी वास्तविकता को समझता है, Prem Madhuri में प्रेम की कहानी यदि लोगों को बताई जाए या प्रेम के बारे में लोगों को बताया जाए तो इसमें केवल बदनामी ही मिलेगी-कुछ लाभ नहीं होगा। प्रेम को रोकने के … Read more

पवन दूतिका की सरल व्याख्या

पवन दूतिका की सरल व्याख्या

पवन दूतिका की सरल व्याख्या : अयोध्यासिंह उपाध्याय द्वारा रचित Pawan Dutika , कालिदास द्वारा प्रेरित होकर दूत के रूप में पवन से अपनी विरह संदेश श्रीमती राधिका जी भेजती है।   अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ जीवन परिचय :- अयोध्या सिंह उपाध्याय का जन्म 15 अप्रैल, सन् 1865 ई को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के … Read more