चन्द्रलोक में प्रथम बार: chandralok mein pratham bar

Chandralok mein pratham bar

Chandralok mein pratham bar: सुमित्रानंदन पंत जी द्वारा रचित चन्द्रलोक में प्रथम बार नामक शीर्षक से लिया गया है। इसमें मानव की मानवता के लिए विश्व का आह्वाहन किया गया है। जो विश्व बंधुत्व का संदेश देता है। कवि इस ऐतिहासिक घटना को मानवता के लिए गौरवपूर्ण और नए युग का प्रारंभ मानते हैं। Chandralok … Read more

चींटी की व्याख्या – सुमित्रानंदन पंत: chiti ki Vyakhya sumitranand pant

chiti ki Vyakhya sumitranand pant

chiti ki Vyakhya sumitranand pant: प्रस्तुत कविता के माध्यम से कवि सुमित्रानंदन पंत हमें यह शिक्षा देने का संदेश देते है कि हमें भी चींटी की तरह परिश्रमी, अनुशासित, निडर और सहयोगी बनना चाहिए। निरंतर प्रयास और एकता से बड़े से बड़ा कार्य भी संभव हो सकता है। कवि ने छोटे से जीव चींटी के … Read more

वन पथ पर की सरल व्याख्या: Van Path Par Vyakhya

van path par vyakhya

van path par vyakhya: तुलसीदास कृत “वन पथ पर” नामक शीर्षक से रचित रचना में राम और सीता के प्रति लज्जा, अनुरक्ति, सौंदर्य वर्णन और समर्पण भाव को दर्शाया गया है।   वन पथ पर – तुलसीदास:- पद्य – 1 पुर तें निकसी रघुबीर-बधू, धरि धीर दए मग में डग द्वै। झलकी भरि भाल कनी … Read more

धनुष भंग – तुलसीदास: dhanush bhang ki Saral vyakhya

dhanush bhang ki Saral vyakhya

dhanush bhang ki Saral vyakhya: “यह प्रसंग रामचरितमानस के सीता स्वयंवर (धनुष-भंग) का है, जहाँ माता सीता श्रीराम के प्रति अपने प्रेम, लज्जा और विश्वास को प्रकट करती हैं। पूरे प्रसंग में सीता जी की लज्जा, प्रेम, विश्वास और श्रीराम के प्रति अटूट समर्पण का अत्यंत सुंदर चित्रण हुआ है। साथ ही श्रीराम की सर्वज्ञता … Read more

नीति और भक्ति के दोहे बिहारीलाल: Bihari Lal Ke Niti Aur Bhakti Ke Dohe

Bihari Lal Ke Niti Aur Bhakti Ke Dohe

Bihari Lal Ke Niti Aur Bhakti Ke Dohe: प्रस्तुत पद्यांश कवि बिहारीलाल की प्रसिद्ध कृति बिहारी सतसई से लिए गए हैं। इन दोहों में भगवान श्रीकृष्ण और राधा की भक्ति, सौंदर्य-चित्रण तथा भक्ति-भाव का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है। बिहारीलाल के भक्ति दोहे की व्याख्या :- भक्ति मेरी भव-बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन … Read more

अलक्षेन्द्र-पुरुराज संस्कृत संवाद हिन्दी अनुवाद: Veer veeren pujyate class 10 Hindi anuvad

Veer veeren pujyate class 10 Hindi anuvad

वीर ही वीर का सम्मान करता है – Veer veeren pujyate class 10 Hindi anuvad :- वीर:वीरेण पूज्यंते पाठ में सिकंदर और भारतीय राजा पुरूराज के बीच वीरता पूर्ण संवाद है।  बंदी होने पर भी पुरुराज की निर्भीकता, देशप्रेम और वीरता देख सिकंदर उन्हें मित्र मानता है और सम्मानपूर्वक राज्य वापस कर देता है, जो … Read more

क्या लिखूं पाठ की सरल व्याख्या और प्रश्न उत्तर: Kya Likhun Paath Ki Vyakhya

kya likhun paath ki vyakhya

kya likhun paath ki vyakhya: आज जो तरुण हैं वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे। उनके स्थान में तरुणों का फिर दूसरा दल आ जाएगा जो भविष्य का स्वप्न देखेगा। दोनों के ही स्वप्न सुखद होते हैं; क्योंकि दूर के ढोल सुहावने होते हैं। क्या लिखूं पाठ की गंद्याश व्याख्या और प्रश्न … Read more

ken kim vardhate vyakhya: केन किं वर्धते? किससे क्या बढ़ता है?

ken kim vardhate vyakhya

ken kim vardhate vyakhya: किससे क्या बढ़ता है विभिन्न स्थितियों और परिस्थितियों में मानव जो व्यवहार करता है। उसी के अनुसार उसके जीवन में चीज अच्छाई के रूप में और बुराई के रूप में बढ़ती है। क्रिया यदि अच्छी होगी तो अच्छाई बढ़ेगी। क्रियाएं यदि बुरी होगी तो बुरी आदतें बढ़गी। केन किं वर्धते सरल … Read more

Raskhan ke Savaiye Ki Vyakhya Class 10: रसखान के सवैया की सरल व्याख्या

raskhan ke savaiye ki vyakhya class 10

raskhan ke savaiye ki vyakhya class 10: रसखान जी श्री कृष्ण के प्रति अपना आसक्त भाव दिखाते हुए कहते हैं कि, हे भगवन! मृत्यु के पश्चात यदि दोबारा इस पृथ्वी पर जन्म होए, तो मैं मनुष्य के रूप में उसी ब्रजभूमि में जन्म लूं और ग्वाल बालों के बीच में निवास करूं।       … Read more

Surdas Ke Pad ki Vyakhya Class 10th Up Board

Surdas Ke Pad ki Vyakhya Class 10th Up Board

Surdas Ke Pad ki Vyakhya Class 10th Up Board: प्रस्तुत पद में श्री कृष्ण के बाल रूप से लेकर के युवावस्थाओं तक लीलाओं का वर्णन किया गया है। और निराकार ब्रह्म से लेकर के साकार ब्रह्म की उपासना का भी वर्णन किया गया है। निराकार ब्रह्म से श्रेष्ठ कर साकार ब्रह्म को बताया गया है। … Read more