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UP Board Class 10 Hindi Model Paper 2027: यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं का मॉडल पेपर 2026-27 छात्रों को नवीनतम परीक्षा पैटर्न को समझने और उसके अनुसार परीक्षा की तैयारी करने में मदद करने के लिए बनाया गया है। जो मॉडल पेपर तैयार किया गया है वह UPMSP के अनुसार तैयार किया गया है।.
यूपी बोर्ड परीक्षा में कैसे लिखें, कितना लिखें ?
बोर्ड परीक्षा में कैसे लिखें कितना लिखें पूरा पेपर हल करके बताया गया है । आगामी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को यूपी 10वीं हिन्दी के सैंपल पेपर 2027 का अभ्यास अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार और सार, नवीनतम संशोधित परीक्षा पैटर्न आदि की समझने में मदद मिलेगी। पूरा माॅडल पेपर पढ़ने पर आप निश्चित ही अच्छे नंबर ला पाएंगे।
UP Board Class 10 Hindi Model Paper 2027 Important Instructions :-
इसे जरूर पढ़ें – एक परीक्षार्थी को परीक्षा देते समय किस प्रश्न का उत्तर कैसे और कितना लिखना चाहिए। इस माॅडल पेपर में लिखकर बताया गया है। जो परीक्षा के लिएै उपयोगी और अच्छे नंबर लाने में सहायक होगी।
सामान्य निर्देश….
- प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
- सभी प्रश्नों के उत्तर देने अनिवार्य है।
- सभी प्रश्नों हेतु निर्धारित अंक उनके सम्मुख अंकित हैं।
- इस प्रश्नपत्र के दो खण्ड, खण्ड-अ तथा खण्ड-ख हैं।
- खण्ड-अ के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर केवल प्रदत्त OMR उत्तर पत्रक पर ही उत्तर दें। OMR उत्तर पत्रक पर उत्तर देने के पश्चात् उसे नहीं काटें तथा इरेजर अथवा व्हाइटनर का प्रयोग न करें।
- खण्ड-ब में 50 अंक के वर्णनात्मक प्रश्न हैं.
- खण्ड-ब के प्रश्नों के उत्तर यथासम्भव क्रमानुसार लिखने का प्रयास कीजिए।
खण्ड – अ ~~ बहुविकल्पीय प्रश्न
1. ‘पण्डित प्रतापनारायण मिश्र’ लेखक हैं (1 अंक)
(a) द्विवेदी युग के
(b) शुक्ल युग के
(c) भारतेन्दु युग के ✔️
(d) शुक्लोत्तर युग के
2. ‘सेवासदन’ उपन्यास के लेखक हैं। (1 अंक)
(a) जैनेन्द्र
(b) यशपाल
(c) जयशंकर प्रसाद
(d) प्रेमचन्द✔️
3. जयशंकर प्रसाद का नाटक नहीं है। (1 अंक)
(a) ध्रुवस्वामिनी
(b) चन्द्रगुप्त
(c) लहरों के राजहंस✔️
(d) स्कन्दगुप्त
4. शुक्ल युग की समयावधि है (1 अंक)
(a) 1990 से 1918 ई. तक
(b) 1936 से 1943 ई. तक
(c) 1918 से 1938 ई. तक✔️
(d) 1850 से 1990 ई. तक
5. निम्नलिखित में से कहानी है (1 अंक)
1. कफन
2. तितली
3. ममता
4. इन्दुमती
कूट
(a) केवल 1
(b) 1,3 और 4✔️
(c) 2 और 3
(d) ये सभी
6. दीपदान’ एकांकी के रचनाकार हैं. (1 अंक)
(a) भुवनेश्वर
(b) रामकुमार वर्मा✔️
(c) जयशंकर प्रसाद
(d) विष्णु प्रभाकर
7. ‘दीपशिखा’ काव्य-संग्रह रचना है. (1 अंक)
(a) महादेवी वर्मा की✔️
(b) जयशंकर प्रसाद की
(c) सुभद्रा कुमारी चौहान की
(d) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ की
8. प्रसिद्ध आत्मकथा ‘क्या भूलूँ क्या याद करूँ’ के लेखक हैं (1 अंक)
(a) हरिवंश राय ‘बच्चन’✔️
(b) रामविलास शर्मा
(c) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(d) पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’
9. ‘बिहारी’ किस युग के कवि हैं? (1 अंक)
(a) आधुनिक काल
(b) रीतिकाल✔️
(c) भक्तिकाल
(d) आदिकाल
10. ‘तारसप्तक’ के सम्पादक हैं (1 अंक)
(a) केशव
(b) नरेन्द्र शर्मा
(c) भवानी प्रसाद मिश्र
(d) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’✔️
11. संचारी भावों की संख्या है (1 अंक)
(a) 27
(b) 29
(c) 31
(d) 33✔️
12. ‘मुख मयंक सम मंजु मनोहर’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है? (1 अंक)
(a) रूपक अलंकार
(b) अनुप्रास अलंकार
(c) उपमा अलंकार✔️
(d) उभयालंकार
13. रोला छन्द के प्रत्येक चरण में मात्राएँ होती है (1 अंक)
(a) 22
(b)36
(c) 24✔️
(d) 12
14. ‘निष्कपट’ शब्द में उपसर्ग है। (1 अंक)
(a) निष
(b) निस्✔️
(C) निःसंदेह
(d) निस
15. ‘खरगोश तेज दौड़ता है।’ वाक्य में लाल शब्द का व्याकरणिक परिचय है। (1 अंक)
(a) क्रिया
(b) सर्वनाम
(c) संज्ञा
(d) रीतिवाचक क्रिया-विशेषण ✔️
16. ‘पंचवटी’ में कौन-सा समास है? (1 अंक)
(a)अव्ययीभाव
(b) कर्मधारय
(c) तत्पुरुष
(d) द्विगु✔️
17. ‘गोरा’ का तत्सम रूप है (1 अंक)
(a) गौर✔️
(b) सफेद
(c) गोरी
(d) गोर
18. अनुसन्धान में उपसर्ग है (1 अंक)
(a) अन
(b) अनु✔️
(c) अनुस
(d) इनमें से कोई नहीं
19. निम्न में विकारी शब्द है। (1 अंक)
(a) इधर
(b) यमुना✔️
(c) परन्तु
(d) निकट
20. ‘ताभिः’ शब्द का विभक्ति एवं वचन है (1 अंक)
(a) द्वितीया द्विवचन
(b) चतुर्थी एकवचन
(c) पंचमी एकवचन
(d) तृतीया बहुवचन✔️
खण्ड – ब ~~ वर्णनात्मक प्रश्न
1. निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (3×2=6 अंक)
ईर्ष्या की बेटी का नाम निन्दा है, जो व्यक्ति ईर्ष्यालु होता है, वही बुरे किस्म का निन्दक भी होता है। दूसरों की निन्दा वह इसलिए करता है कि इस प्रकार, दूसरे लोग जनता अथवा मित्रों की आँखों से गिर जाएँगे और तब जो स्थान रिक्त होगा, उस पर मैं अनायास ही बैठा दिया जाऊँगा।
प्रश्न (i)– उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘ईर्ष्या, तू न गयी मेरे मन से’ नामक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक ‘आचार्य रामचन्द्र शुक्ल‘ हैं। इसमें लेखक ने ईर्ष्या के स्वभाव और उसके दुष्परिणामों का वर्णन किया है।
प्रश्न (ii) – उपर्युक्त सम्पूर्ण अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – लेखक आचार्य रामचंद्र शुक्ल कहते हैं कि ईर्ष्या की बेटी निन्दा है। अर्थात् जो व्यक्ति दूसरों से ईर्ष्या करता है, वह प्रायः उनकी निन्दा भी करने लगता है। ईर्ष्यालु व्यक्ति यह सोचता है कि यदि वह दूसरों को समाज, जनता या मित्रों की नजरों में गिरा देगा, तो उनके सम्मान और प्रतिष्ठा का स्थान खाली हो जाएगा। फिर वह स्वयं उस स्थान को प्राप्त कर सकेगा और लोगों के बीच अधिक सम्मान पा सकेगा। इस प्रकार ईर्ष्या व्यक्ति को दूसरों की अच्छाइयों को स्वीकार करने के बजाय उनकी बुराइयाँ खोजने और उनका प्रचार करने के लिए प्रेरित करती है।
प्रश्न (iii) – ईर्ष्यालु व्यक्ति दूसरों की निन्दा क्यों करता है?
उत्तर – ईर्ष्यालु व्यक्ति दूसरों की निन्दा इसलिए करता है कि दूसरे लोग जनता या मित्रों की दृष्टि में गिर जाएँ और उनके सम्मान का स्थान खाली हो जाए। उस खाली स्थान पर वह स्वयं प्रतिष्ठित होना चाहता है।
2. निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (3×2=6 अंक)
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ में देना तुम फेंक ।
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक।।
प्रश्न (i) – उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
संदर्भ :-
प्रस्तुत प्रसिद्ध पंक्तियाँ देश प्रेमी कवि माखनलाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध कविता हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी में “पुष्प की अभिलाषा” नामक शीर्षक से ली गई हैं।
प्रश्न (ii) – रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – राष्ट्रप्रेमी कवि माखनलाल चतुर्वेदी कहते हैं कि फूल की सबसे बड़ी इच्छा यह है कि माली उसे तोड़कर उस रास्ते पर फेंक दे, जिस मार्ग से देश के वीर सैनिक अपनी मातृभूमि की रक्षा और उसके लिए अपना बलिदान देने जाते हैं। इस प्रकार वह पुष्प भी उन भारतीय वीरों के चरणों में पड़कर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहता है।
प्रश्न (iii)- उपर्युक्त पद्यांश के अनुसार पुष्प की क्या अभिलाषा है?
उत्तर – पुष्प की सच्ची अभिलाषा
बलिदान का मार्गः फूल वनमाली से कहता है कि हे वनमाली! तू मुझे उस रास्ते पर तोड़कर फेंक देना,
वीर सैनिकों का पथः जिस रास्ते से देश के लिए अपना सिर (प्राण) कटाने के लिए वीर सैनिक जा रहे हों।
परम सम्मानः वीरों के पैरों तले कुचल जाना ही फूल अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य और सम्मान मानता है। अर्थात् इस मातृभूमि में वीरों के मार्ग पर बिछने की है।
अंतिम सर्वोच्च इच्छाः पुष्प वनमाली (माली) से विनती करता है कि उसे उस रास्ते पर फेंक दिया जाए जहाँ से देशभक्त और वीर जवान अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए गुजरते हैं।
3. दिए गए संस्कृत गद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए। (5 अंक)
“आम्र स्वीकृतः समयः” इति कथिते तस्मिन् नागरिके सः ग्रामीणः नागरिकम् अवदत्, “प्रथमं भवान् एव पृच्छतु।” नागरिकश्च तं ग्रामीणम् अकथयत्, “त्वमेव प्रथम पृच्छ” इति। इदं श्रुत्वा सः ग्रामीणः अवदत्, “युक्तम, अहमेव प्रथमं पृच्छामि।”
उत्तर – सन्दर्भ :- प्रस्तुत गद्यांश संस्कृत पाठ ‘प्रबुद्धो ग्रामीणः‘ से लिया गया है। इसमें एक नागरिक और ग्रामीण के बीच हुए संवाद का वर्णन है।
हिन्दी अनुवाद :-
“समय निश्चित है” ऐसा कहे जाने पर उस ग्रामीण ने नागरिक से कहा – “पहले आप ही पूछिए।” नागरिक ने भी उस ग्रामीण से कहा – “तुम ही पहले पूछो।” यह सुनकर वह ग्रामीण बोला -“ठीक है, मैं ही पहले पूछता हूँ।”
4. दिए गए संस्कृत श्लोक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए। (5 अंक)
सार्थः प्रवसतो मित्रं
भार्या मित्रं गृहे सतः।
आतुरस्य भिषक् मित्रं
दानं मित्रं मरिष्यतः।।
उत्तर :- सन्दर्भ :- प्रस्तुत श्लोक ‘जीवन सूत्राणि‘ नामक पाठ से लिया गया है। इसमें अलग-अलग परिस्थितियों में मनुष्य के सच्चे मित्र के बारे में बताया गया है।
हिन्दी अनुवाद :-
प्रवास करने वाले व्यक्ति का मित्र उसका सार्थ (यात्रियों का समूह/साथी) होता है। घर में रहने वाले व्यक्ति की पत्नी उसकी मित्र होती है। रोगी व्यक्ति का चिकित्सक (वैद्य) मित्र होता है और मृत्यु के निकट पहुँचे हुए व्यक्ति का दान ही मित्र होता है।
5. अपने पठित खण्डकाव्य के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए। (3 अंक)
(क) ‘जय सुभाष‘ खण्डकाव्य के प्रथम सर्ग की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :- (परीक्षार्थी अपने जिले के अनुसार खंडकाव्य की व्याख्या करेंगे।)
‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य के प्रथम सर्ग की कथावस्तु
‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य के प्रथम सर्ग में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के जन्म, बाल्यकाल तथा उनके देशभक्ति-भाव के विकास का वर्णन किया गया है। सुभाष बचपन से ही तेजस्वी, साहसी और स्वाभिमानी थे। उनमें देश के प्रति गहरा प्रेम था। वे भारतीयों पर अंग्रेजों के अत्याचार देखकर अत्यन्त दुखी होते थे। उनके मन में भारत को पराधीनता से मुक्त कराने की तीव्र इच्छा उत्पन्न हुई। शिक्षा प्राप्त करते समय भी उनके भीतर राष्ट्रीय चेतना जाग्रत रही। उन्होंने अंग्रेजी शासन की नौकरी को स्वीकार करने के बजाय देश-सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। इस प्रकार प्रथम सर्ग में सुभाष के व्यक्तित्व, देशप्रेम और स्वतंत्रता-संकल्प की आधारभूमि प्रस्तुत की गई है।
6. (क) दिए गए लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए (5 अंक)
(i) भगवतशरण उपाध्याय
(ii) जयशंकर प्रसाद
(iii) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
प्रश्नोत्तर 6 (क) (ii) :-
जयशंकर प्रसाद : जीवन-परिचय
जयशंकर प्रसाद हिन्दी साहित्य के महान कवि, नाटककार, कहानीकार और उपन्यासकार थे। उनका जन्म 30 जनवरी 1889 को वाराणसी में एक समृद्ध वैश्य परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम देवीप्रसाद साहू था। प्रसाद जी ने घर पर ही हिन्दी, संस्कृत, उर्दू और फारसी का अध्ययन किया। वे हिन्दी साहित्य के छायावाद के प्रमुख स्तंभों में गिने जाते हैं।
जयशंकर प्रसाद की प्रमुख रचनाएँ ‘कामायनी’, ‘आँसू’, ‘लहर’ और ‘झरना’ हैं। ‘स्कंदगुप्त’, ‘चंद्रगुप्त’ और ‘ध्रुवस्वामिनी’ उनके प्रसिद्ध नाटक हैं। उनकी रचनाओं में प्रकृति-प्रेम, मानवीय संवेदना, राष्ट्रीय चेतना और दर्शन की सुंदर अभिव्यक्ति मिलती है। 15 नवम्बर 1937 को वाराणसी में उनका निधन हुआ।
(ख) दिए गए कवियों में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए। (5 अंक)
(i) महाकवि सूरदास
(ii) महादेवी वर्मा
(iii) बिहारीलाल
प्रश्नोत्तर 6 (ख) (iii) :-
बिहारीलाल : जीवन-परिचय
बिहारीलाल हिन्दी साहित्य के रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म लगभग 1595 ई. में ग्वालियर के पास बसुआ गोविंदपुर गाँव में माना जाता है। उनके पिता का नाम केशवराय बताया जाता है। बिहारी ने मुख्यतः ब्रजभाषा में काव्य रचना की। वे अपनी सूक्ष्म कल्पना, भाव-व्यंजना और अलंकार-प्रयोग के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी एकमात्र प्रसिद्ध कृति ‘बिहारी सतसई’ है, जिसमें लगभग सात सौ दोहों का संग्रह है। उनके दोहों में श्रृंगार, नीति, भक्ति और जीवन के विविध अनुभवों का सुंदर चित्रण मिलता है। बिहारी की भाषा अत्यंत संक्षिप्त, प्रभावशाली और अर्थगर्भित है। हिन्दी साहित्य में उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
7. अपनी पाठ्य पुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए, जो इस प्रश्न-पत्र में न आया हो। (2 अंक)
उत्तर –
अपदो दूरगामी च साक्षरो न च पण्डितः ।
अमुखः स्फुटवक्ता च यो जानाति स पण्डितः।।
8. आपके मोहल्ले की नालियों की समुचित सफाई के लिए नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखिए। (4 अंक)
सेवा में,
स्वास्थ्य अधिकारी महोदय,
नगर निगम, प्रयागराज।
विषय: मोहल्ले की नालियों की समुचित सफाई हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे मोहल्ले की नालियाँ काफी समय से साफ नहीं हुई हैं। उनमें कूड़ा-कचरा और गंदगी जमा होने के कारण पानी का निकास अवरुद्ध हो गया है। नालियों का गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है, जिससे दुर्गंध उत्पन्न हो रही है और मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। इससे मोहल्ले में बीमारियाँ फैलने की आशंका बनी हुई है।
अतः आपसे अनुरोध है कि हमारे मोहल्ले की नालियों की शीघ्र समुचित सफाई करवाने तथा नियमित रूप से सफाई की व्यवस्था करने की कृपा करें।
धन्यवाद।
भवदीय
एक मोहल्लावासी
दिनांक: 00/00/0000
स्थान: _प्रयागराज__
9. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए। (2 अंक)
(क) ज्ञानं कुत्र संभावनाति ?
उत्तर – ज्ञानं सर्वत्र संभाव्यति।
(ख) गीतायाः कः सन्देशः?
उत्तर – गीतायाः सन्देश अस्ति-हतो वा प्राप्यसि स्वर्गं जित्वा भोक्ष्यसे महीम्।
(छ) पुरुराजः कः आसीत्?
उत्तर – पुरुराजः भारतस्य एकः वीरः
नृपः आसीत्।
(घ) भारतीय संस्कृतिः केषां संगमस्थली?
उत्तर – भारतीय संस्कृतिः सर्वेषां मतावलम्बिनां सङ्गमस्थली।
10. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए। (7 अंक)
(क) देशप्रेम
(ख) प्रदूषण का प्रभाव
(ग) बेरोजगारी की समस्या
(घ) हमारा प्यारा भारतवर्ष
(ङ) मेरा प्रिय कवि
प्रश्नोत्तर 10 (ङ) :-
बेरोजगारी की समस्या
प्रस्तावना
बेरोजगारी हमारे देश की प्रमुख सामाजिक और आर्थिक समस्याओं में से एक है। जब कोई व्यक्ति काम करने योग्य और इच्छुक होने के बावजूद रोजगार प्राप्त नहीं कर पाता, तो उसे बेरोजगारी कहते हैं। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में यह समस्या अधिक गंभीर है।
बेरोजगारी के कारण
बेरोजगारी के अनेक कारण हैं। बढ़ती जनसंख्या, रोजगार के पर्याप्त अवसरों का अभाव, शिक्षा और रोजगार में असंतुलन, उद्योगों का पर्याप्त विकास न होना तथा तकनीकी विकास इसके प्रमुख कारण हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पर अत्यधिक निर्भरता और साल भर काम न मिलना भी बेरोजगारी को बढ़ाता है।
बेरोजगारी के दुष्परिणाम
बेरोजगारी के कारण व्यक्ति में निराशा, तनाव और असंतोष बढ़ता है। आर्थिक कठिनाइयों के कारण जीवन-स्तर गिर जाता है। इससे गरीबी, अपराध, भ्रष्टाचार और सामाजिक अशांति जैसी समस्याएँ भी बढ़ सकती हैं। देश की आर्थिक प्रगति पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
बेरोजगारी के समाधान
इस समस्या के समाधान के लिए सरकार को नए उद्योग स्थापित करने तथा लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए। शिक्षा को रोजगारपरक बनाया जाना चाहिए और युवाओं को तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
उपसंहार
बेरोजगारी का समाधान सरकार, उद्योग और समाज के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। युवाओं को भी अपने कौशल और योग्यता का विकास करना चाहिए। उचित योजनाओं और निरंतर प्रयासों से बेरोजगारी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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