📚 UP Board Class 12 Hindi के सभी अध्याय देखें → Click Here
UP Board Class 12 Hindi Model Paper 2027: यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं का मॉडल पेपर 2026-27 छात्रों को नवीनतम परीक्षा पैटर्न को समझने और उसके अनुसार परीक्षा की तैयारी करने में मदद करने के लिए बनाया गया है। जो मॉडल पेपर तैयार किया गया है वह UPMSP के अनुसार तैयार किया गया है।
यूपी बोर्ड परीक्षा में कैसे लिखें, कितना लिखें ?
बोर्ड परीक्षा में कैसे लिखें कितना लिखें पूरा पेपर हल करके बताया गया है । आगामी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को यूपी 12वीं हिन्दी के सैंपल पेपर 2027 का अभ्यास अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार और सार, नवीनतम संशोधित परीक्षा पैटर्न आदि की समझने में मदद मिलेगी। पूरा माॅडल पेपर पढ़ने पर आप निश्चित ही अच्छे नंबर ला पाएंगे।
Model paper -1
UP Board Class 12 Hindi Model Paper :-
सामान्य निर्देश….
(i) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
(ii) सभी प्रश्नों के उत्तर देने अनिवार्य है।
(iii) सभी प्रश्नों हेतु निर्धारित अंक उनके सम्मुख अंकित हैं।
नोट – एक परीक्षार्थी को परीक्षा देते समय किस प्रश्न का उत्तर कैसे और कितना लिखना चाहिए। इस माॅडल पेपर में लिखकर बताया गया है। जो परीक्षा के लिए उपयोगी और अच्छे नंबर लाने में सहायक होगी।
प्रश्न 1. (क) आदिकाल का नाम ‘वीरगाथा काल’ किस इतिहासकार ने रखा है? – (1 अंक)
(a) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(b) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(c) शान्तिप्रिय द्विवेदी
(d) रामचन्द्र शुक्ल
(ख) ‘खालिकबारी’ के रचयिता हैं – (1 अंक)
(a) अमीर खुसरो
(b) अबुल फजल
(c) ख्वाजा अहमद
(d) अब्दुर्रहमान
(ग) निम्नलिखित में से कौन अपनी व्यंग्य रचनाओं के लिए प्रसिद्ध हैं? – (1 अंक )
(a) श्यामसुन्दर दास
(c) हरिशंकर परसाई
(b) गुलाब राय
(d) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) ‘रूपक रहस्य’ रचना है (1 अंक )
(a) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की
(b) श्यामसुन्दर दास की
(c) वासुदेवशरण अग्रवाल की
(d) जैनेन्द्र कुमार की
(ङ) ‘तन्त्रालोक से यन्त्रालोक तक’ रचना की विधा है (1 अंक)
(a) भेंट वार्ता
(b) संस्मरण
(c) रिपोर्ताज
(d) यात्रावृत्त
प्रश्न 2. (क) ‘मैं नीर भरी दुःख की बदली’ काव्य पंक्ति के रचनाकार हैं (1 अंक )
(a) महादेवी वर्मा
(b) निराला
(c) नागार्जुन
(d) शिवरानी देवी
(ख) ‘हिरोशिमा’ किस लेखक की रचना है? (1 अंक)
(a) सुमित्रा नन्दन पन्त
(b) अज्ञेय
(c) त्रिलोचन
(d) मुक्तिबोध
(ग) ‘धरती’ काव्य संग्रह के रचयिता हैं (1 अंक)
(a) त्रिलोचन
(b) अज्ञेय
(c) केदारनाथ अग्रवाल
(d) प्रभाकर माचवे
(घ) हिन्दी का पहला उपन्यास है (1 अंक )
(a) आंनदमठ
(b) परीक्षा गुरु
(c) गबन
(d) चन्द्रकान्ता
(ङ) निम्नलिखित में से कौन-सी पन्त जी की प्रगतिवादी रचना मानी जाती है? (1 अंक )
(a) पल्लव
(b) युगांत
(c) गुंजन
(d) वीणा
प्रश्न -3 निम्नलिखित गंद्याश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए। ( 5 × 2 = 10 अंक )
धरती माता की कोख में जो अमूल्य निधियाँ भरी हैं, जिनके कारण वह वसुन्धरा कहलाती है उससे कौन परिचित न होना चाहेगा? लाखों-करोड़ों वर्षों से अनेक प्रकार की धातुओं को पृथिवी के गर्भ में पोषण मिला है। दिन-रात बहनेवाली नदियों ने पहाड़ों को पीस-पीसकर अगणित प्रकार की मिट्टियों से पृथिवी की देह को सजाया है। हमारे भावी आर्थिक अभ्युदय के लिए इन सबकी जाँच-पड़़ताल अत्यन्त आवश्यक है। पृथिवी की गोद में जन्म लेनेवाले जड़-पत्थर कुशल शिल्पियों से सँवारे जाने पर अत्यन्त सौन्दर्य के प्रतीक बन जाते हैं। नाना भाँति के अनगढ़ नग विन्ध्य की नदियों के प्रवाह में सूर्य की धूप से चिलकते रहते हैं, उनको जब चतुर कारीगर पहलदार कटाव पर लाते हैं तब उनके प्रत्येक घाट से नई शोभा और सुन्दरता फूट पड़ती है, वे अनमोल हो जाते हैं। देश के नर-नारियों के रूपमण्डन और सौन्दर्य प्रसाधन में इन छोटे पत्थरों का भी सदा से कितना भाग रहा है; अतएव हमें उनका ज्ञान होना भी आवश्यक है।
प्रश्न- (क) गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
अथवा उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ पुस्तक हिंदी के गद्य भाग में निहित ‘राष्ट्र का स्वरूप नामक’ पाठ से लिया गया है इसके लेखक ‘डॉ• वासुदेव शरण अग्रवाल’ जी हैं।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – मानव जीवन के आर्थिक उन्नति के लिए पृथ्वी पर प्राप्त होने वाले संसाधनों की जांच पड़ताल आवश्यक है। क्योंकि पृथ्वी की गोद में जन्म लेने वाले जड़ – अचेतन मानव इसी पृथ्वी पर रहते हुए, प्रकृति से सीखते हुए शिल्पकार बन जाते हैं। मानव विन्ध्य प्रवाह क्षेत्र में जब पत्थरों पर धूप की किरणें पड़ती है तो वह चमकता है। लेकिन मानव को उन मणियों का ज्ञान नहीं था। धीरे-धीरे उनका ज्ञान बड़ा होता गया। वह छोटे-छोटे पत्थरों को भी नया रूप देकर उनकी कीमत को अनमोल कर दिए। जैसे मूंगा पुखराज आदि मणियां। अर्थात् पृथ्वी संसाधनों से भरी हुई। बस मानव को उन संसाधनों की पहचान की आवश्यकता है। जिससे वह अपना भरण पोषण और आर्थिक उन्नति कर सके।
(ग) हमारे भावी आर्थिक अभ्युदय के लिए किसकी जाँच-पड़़ताल अत्यन्त आवश्यक है?
उत्तर – पृथ्वी पर प्राप्त होने वाले संसाधनों की जांच पड़ताल आवश्यक है।
(घ) उपर्युक्त गद्यांश में राष्ट्र निर्माण के किस प्रथम तत्त्व का महत्त्व दर्शाया गया है?
उत्तर – पृथ्वी पर प्राप्त होने वाले अमूल्य निधियां का महत्व दर्शाया गया है।
(ङ) धरती को ‘वसुन्धरा’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर – पृथ्वी के गर्भ में छिपे हुए अनेकों प्रकार की धातुओं और खनिज भंडार के कारण पृथ्वी को वसुंधरा कहा जाता है।
प्रश्न 4- निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए। ( 5 × 2 =10 अंक )
तदनन्तर बैठी सभा उटज के आगे,
नीले वितान के तले दीप बहु जागे।
टकटकी लगाए नयन सुरों के थे वे,
परिणामोत्सुक उन भयातुरों के थे वे।
उत्फुल्ल करौंदी-कुंज वायु रह-रहकर
करती थी सबको पुलक-पूर्ण मह-महकर।
वह चन्द्रलोक था, कहाँ चाँदनी वैसी,
प्रभु बोले गिरा, गम्भीर नीरनिधि जैसी।
(i) प्रस्तुत पद्यांश के शीर्षक तथा कवि का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर – प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के पद्य खण्ड में निहित ‘कैकेयी का अनुताप ‘ शीर्षक से लिया गया है, जो ‘राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त’ द्वारा रचित है।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – वह स्थान चन्द्रलोक के समान प्रतीत हो रहा था। ऐसी अनुपम चाँदनी अन्यत्र कहीं दिखाई नहीं देती थी। इस शांत, सुंदर और अलौकिक वातावरण में श्रीराम ने समुद्र के समान अत्यंत गंभीर और धीर स्वर में बोलना आरम्भ किया।
(iii) प्रस्तुत पद्यांश किस प्रसंग से सम्बन्धित है?
उत्तर – यह पद्यांश उस समय के प्रसंग से सम्बन्धित है जब भरत अयोध्यावासियों तथा माताओं के साथ श्रीराम को वन से अयोध्या वापस लाने के लिए पंचवटी आए थे। रात में श्रीराम की कुटिया के सामने सभा बैठी और उसी सभा के वातावरण का कवि ने वर्णन किया है
(iv) “उत्फुल्ल करौंदी-कुंज वायु रह-रहकर” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – इस पंक्ति का आशय है कि फूलों से खिले हुए करौंदी के कुंज से सुगंधित और शीतल हवा बार-बार बह रही थी। उसकी सुगंध से वहाँ उपस्थित सभी लोगों के मन में प्रसन्नता, उत्साह और रोमांच का संचार हो रहा था।
(v) प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि द्वारा किस भाव की अभिव्यक्ति हुई है?
उत्तर – इन पंक्तियों में मुख्य रूप से उत्सुकता, आशंका, श्रद्धा और आशा का भाव व्यक्त हुआ है। साथ ही, प्रकृति के सुंदर और शांत वातावरण के माध्यम से आनंद तथा पवित्रता का भाव भी प्रकट किया गया है।
प्रश्न 5. (क) निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए उनकी कृतियों पर प्रकाश डालिए। (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द) – 5 अंक
(i) पण्डित दीनदयाल उपाध्याय
(ii) वासुदेवशरण अग्रवाल
(iii) जैनेन्द्र कुमार
प्रश्नोत्तर 5 (क) (ii) –
वासुदेवशरण अग्रवाल – जीवन-परिचय एवं कृतियाँ
डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल का जन्म 7 अगस्त, 1904 ई. को मेरठ जिले के खेड़ा ग्राम में हुआ था। वे हिन्दी के प्रसिद्ध निबंधकार, आलोचक, पुरातत्त्ववेत्ता एवं भारतीय संस्कृति के विद्वान थे। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.ए. तथा लखनऊ विश्वविद्यालय से डी.लिट् की उपाधि प्राप्त की। उनका साहित्य भारतीय संस्कृति, इतिहास, कला और पुरातत्त्व से विशेष रूप से जुड़ा है।
वासुदेवशरण अग्रवाल की प्रमुख रचनाएँ हैं – पृथिवी-पुत्र, कल्पलता, कल्पवृक्ष, भारत की एकता, माता भूमि, वाग्धारा तथा पाणिनिकालीन भारत । उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का सुंदर चित्रण मिलता है। वासुदेवशरण अग्रवाल जी का 1967 ई. में निधन हो गया।
(ख) निम्नलिखित कवियों में से किसी एक का जीवन-परिचय देते हुए उनकी कृतियों पर प्रकाश डालिए। (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द) – 5 अंक
(i) महादेवी वर्मा
(ii) मैथिलीशरण गुप्त
(iii) जयशंकर प्रसाद
प्रश्नोत्तर 5 (ख) (iii) –
जयशंकर प्रसाद—जीवन-परिचय एवं कृतियाँ
जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी, 1890 ई. को वाराणसी में हुआ था। वे हिन्दी साहित्य के छायावाद के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्होंने कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास और निबंध आदि अनेक विधाओं में रचना की।
जयशंकर प्रसाद की प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं –
काव्य ग्रंथ – कामायनी, आँसू, लहर, झरना, कानन-कुसुम और प्रेम-पथिक ।
प्रमुख नाटक – स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, अजातशत्रु और ध्रुवस्वामिनी हैं।
उपन्यास ग्रन्थ – कंकाल, तितली और इरावती ।
कहानी-संग्रह – आकाशदीप, आँधी और प्रतिध्वनि।
जयशंकर प्रसाद जी का निधन 15 नवंबर, 1937 ई. को हुआ।
प्रश्न 6. (क) ‘खून का रिश्ता’ अथवा ‘पंचलाइट’ कहानी के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए। (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द) – 5 अंक
उत्तर –
पंचलाइट’ कहानी के नायक का चरित्र-चित्रण :-
गोधन का चरित्र-चित्रण :-
फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पंचलाइट’ का प्रमुख पात्र गोधन है। वह एक अल्हड़, मनचला और स्वाभिमानी ग्रामीण युवक है। वह अशिक्षित होते हुए भी अत्यंत योग्य और बुद्धिमान है। पूरे महतो टोले में वही पेट्रोमैक्स जलाना जानता है। वह रूढ़ियों और जातिगत भेदभाव को नहीं मानता तथा मुनरी से प्रेम करता है। इसी कारण पंचायत उसका हुक्का-पानी बंद कर देती है, फिर भी वह अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करता। गोधन निडर और स्वतंत्र विचारों वाला युवक है। गाँव की प्रतिष्ठा बचाने के लिए वह अपने अपमान को भुलाकर पंचलाइट जला देता है। इस प्रकार गोधन के चरित्र में योग्यता, स्वाभिमान, साहस, प्रेम, विवेक और सामाजिक चेतना का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
प्रश्न 7. निम्नलिखित खंडकाव्यों में से स्वपठित खंडकाव्य के आधार पर किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए। – 5 अंक
विषेश बात – यहां केवल एक ही खंडकाव्य का उत्तर दिया जा रहा है। बाकी परीक्षार्थी अपने जिले के अनुसार खंडकाव्य का उत्तर इसी तरह लिख सकते हैं।
(क) “श्रवण कुमार खण्डकाव्य में करुणा एवं प्रेम की विह्वल मन्दाकिनी प्रवाहित होती है।”- इस कथन की विवेचना कीजिए।
अथवा
“दशरथ का अन्तर्द्वन्द्व ‘श्रवण कुमार’ खण्डकाव्य की अनुपम निधि है।” इस उक्ति के आलोक में दशरथ का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर –
श्रवण कुमार खण्डकाव्य में करुणा एवं प्रेम की विवेचना :-
डॉ. शिवबालक शुक्ल द्वारा रचित श्रवण कुमार खण्डकाव्य में करुणा और प्रेम की अत्यंत मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है। इसका प्रधान रस करुण है। श्रवण कुमार अपने वृद्ध एवं नेत्रहीन माता-पिता की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर देता है। माता-पिता के प्रति उसका असीम प्रेम और भक्ति पाठकों के हृदय को द्रवित कर देती है। दशरथ के बाण से घायल होने पर भी श्रवण को अपनी मृत्यु की चिंता नहीं, बल्कि माता-पिता की प्यास की चिंता रहती है। श्रवण की मृत्यु पर माता-पिता का विलाप, दशरथ की आत्मग्लानि तथा पुत्र-वियोग में माता-पिता की मृत्यु अत्यंत करुण प्रसंग हैं। इस प्रकार सम्पूर्ण खण्डकाव्य में वात्सल्य, पितृभक्ति, त्याग और प्रेम के साथ करुणा की भावधारा प्रवाहित होती है।
और अन्त में कहा जा सकता है – “श्रवण कुमार में करुणा और प्रेम की विह्वल मन्दाकिनी का प्रवाह पाठक के हृदय को द्रवित कर देता है।”
प्रश्न 8. (क) निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए। ( 2 + 5 = 7 अंक )
संस्कृतसाहित्यस्य आदिकविः वाल्मीकिः, महर्षिर्व्यासः, कविकुलगुरुः कालिदासः अन्ये च भास-भारवि-भवभूत्यादयो महाकवयः स्वकीयैः ग्रन्थरत्नैः अद्यापि पाठकानां हृदि विराजन्ते। इयं भाषा अस्माभिः मातृसमं सम्माननीया वन्दनीया च, यतो भारतमातुः स्वातन्त्र्यं, गौरवम् अखण्डत्वं सांस्कृतिकमेकत्वञ्च संस्कृतेनैव सुरक्षितुं शक्यन्ते। इयं संस्कृतभाषा सर्वासु भाषासु प्राचीनतमा श्रेष्ठा चास्ति। ततः सुष्ठक्तम् ‘भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाणभारती’ इति।
उत्तर –
सन्दर्भ :- प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी के संस्कृत खंड में निहित “आत्मज्ञ सर्वज्ञ” नामक पाठ से लिया गया है।
हिन्दी अनुवाद:-
संस्कृत साहित्य के आदिकवि वाल्मीकि, महर्षि व्यास, कविकुलगुरु कालिदास, और अन्य भास, भारवि, भवभूति आदि महाकवि अपने ग्रंथ रत्नों के द्वारा आज भी पाठकों के हृदय में विराजमान हैं।
यह भाषा हमारे लिए माता के समान सम्माननीय और वंदनीय है, क्योंकि भारतमाता की स्वतंत्रता, गौरव, अखंडता और सांस्कृतिक एकता संस्कृत से ही सुरक्षित और व्यवस्थित की जा सकती है।
यह संस्कृत भाषा सभी भाषाओं में सबसे प्राचीन और श्रेष्ठ है। इसीलिए ठीक ही कहा गया है: ‘भाषाओं में मुख्य, मधुर और दिव्य गीर्वाणभारती (संस्कृत) है।’
(ख) निम्नलिखित संस्कृत पद्यांशो में से किसी एक का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए। ( 2 + 5 = 7 अंक )
अभूत् प्राची पिङ्गा रसपतिरिव प्राप्य कनकं।
गतच्छायश्चन्द्रो बुधजन इव ग्राम्यसदसि ॥
क्षणं क्षीणास्तारा नृपतय इवानुद्यमपराः।
न दीपा राजन्ते द्रविणरहितानामिव गुणाः ॥
उत्तर :-
सन्दर्भ :- प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी के संस्कृत खंड में निहित “भोजस्यौदार्यम्” नामक पाठ से लिया गया है।
हिन्दी व्याख्या :-
पूर्व दिशा (सूर्य की पहली किरण) को पाकर, पारा के समान सुनहरी हो गयी है। चंद्रमा वैसे ही कांतहीन हो गया, जैसे गांव की सभाओं से विद्वज्जन। आसमान में तारे ऐसे नष्ट हो रहे हैं जैसे अनुद्यमियों राजाओं के पास से लक्ष्मी नष्ट हो जाती है। दीपक उसी प्रकार शोभा नहीं पा रहे हैं। जिस प्रकार गुणवान व्यक्तियों की निर्धनता। अर्थात् जैसे गुणवान व्यक्तियों की दरिद्रता गुणों को ढक लेती है।
प्रश्न 9. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर संस्कृत में दीजिए। ( 2 + 2 = 4 अंक )
(क) काकः उलूकस्य विरोधं कथम् अकरोत्?
(ख) श्रीकृष्णः दुर्योधनस्य किम परं नाम वदति?
(ग) हेमन्ते जलचारिणः जले किं नावगाहन्ति?
(घ) कस्य खलु दर्शनेन इदं सर्वं विदितं भवति ?
प्रश्नोत्तर 9 (क) :- काकः उलूकस्य निशाचरस्वभावस्य कारणात् विरोधम् अकरोत्।
प्रश्नोत्तर 9 (ख) :- श्रीकृष्णः दुर्योधनस्य ‘कौन्तेय’ इति अपरं नाम वदति।
प्रश्न 10 . (क) भक्ति रस अथवा वात्सल्य रस की परिभाषा उदाहरण सहित् लिखिए। (2 अंक )
उत्तर :-
वात्सल्य रस :-
जब माता-पिता का अपनी संतान के प्रति प्रेम और स्नेह रस रूप में परिणत होता है, तब वात्सल्य रस कहलाता है।
उदाहरण:
“जसोदा हरि पालने झुलावै।” यहाँ यशोदा का श्रीकृष्ण के प्रति वात्सल्य भाव व्यक्त हुआ है।
(ख) दृष्टान्त अथवा श्लेष अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए। (2 अंक )
उत्तर :-
श्लेष अलंकार :-
जहाँ एक ही शब्द से दो या दो से अधिक अर्थ प्रकट हों, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।
उदाहरण –
सुबरन को ढूँढ़त फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर। यहाँ ‘सुबरन’ शब्द के अनेक अर्थ हैं।
(ग) ‘हरिगीतिका’ अथवा ‘उपेन्द्रवज्रा’ छन्द का लक्षण उदाहरण सहित लिखिए। ( 2 अंक )
उत्तर :-
हरिगीतिका छन्द :-
जिस सम मात्रिक छन्द के प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं तथा 16 और 12 मात्राओं पर यति होती है, उसे हरिगीतिका छन्द कहते हैं। इसके अंत में लघु-गुरु का प्रयोग होता है।
प्रश्न 11. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर अपनी भाषा-शैली में निबन्ध लिखिए। (9 अंक )
(क) जल-संकट से जूझता मानव
(ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता .
(ग) लोकतन्त्र में मीडिया की भूमिका
(घ) इण्टरनेट की दुनिया
उत्तर ( घ ) :-
इंटरनेट की दुनिया :-
प्रस्तावना:
आज का युग विज्ञान और तकनीकी का युग है। विज्ञान ने मानव जीवन को अनेक सुविधाएँ प्रदान की हैं। इंटरनेट आधुनिक विज्ञान की ऐसी देन है, जिसने पूरी दुनिया को एक-दूसरे के बहुत निकट ला दिया है। आज इंटरनेट हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। आज इंटरनेट के बिना हम पूरे समाज से कट जाते हैं।
इंटरनेट का महत्व:
इंटरनेट के माध्यम से हम घर बैठे देश-विदेश की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई, ई-पुस्तकों और शैक्षिक वीडियो का लाभ उठा सकते हैं। ई-मेल, वीडियो कॉल और सोशल मीडिया के द्वारा हम दूर बैठे लोगों से आसानी से संपर्क कर सकते हैं। आज बैंकिंग, खरीदारी, टिकट बुकिंग, सरकारी सेवाएँ और अनेक प्रकार के काम इंटरनेट के माध्यम से कुछ ही मिनटों में किए जा सकते हैं। हमें जो कुछ भी जानकारी चाहिए वह हमें एक ही क्लिक में इंटरनेट के द्वारा मिल जाती है।
इंटरनेट के लाभ:
इंटरनेट ज्ञान का विशाल भंडार है। इसके द्वारा समाचार, विज्ञान, खेल, शिक्षा, रोजगार और मनोरंजन से संबंधित जानकारी आसानी से मिल जाती है। व्यापार और रोजगार के क्षेत्र में भी इंटरनेट ने नई संभावनाएँ पैदा की हैं। ऑनलाइन व्यापार और घर से काम करने की सुविधा ने लोगों के जीवन को सरल बनाया है। आपातकालीन परिस्थितियों में भी इंटरनेट सूचना पहुँचाने का प्रभावी माध्यम है। इंटरनेट के द्वारा ही हम दूर बैठे व्यक्तियों को अपने सामने वीडियो के माध्यम से देख सकते हैं।
इंटरनेट की हानियाँ:
इंटरनेट के अत्यधिक प्रयोग से समय की बर्बादी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं। सोशल मीडिया की लत विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित करती है। साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी, गलत सूचनाएँ और निजी जानकारी के दुरुपयोग जैसी समस्याएँ भी बढ़ रही हैं। इसलिए इंटरनेट का प्रयोग सावधानी और विवेक के साथ करना चाहिए। इंटरनेट के द्वारा समय से पहले बच्चों में गलत आदतें विकसित हो रही है।
उपसंहार:
इंटरनेट आधुनिक जीवन का वरदान है, लेकिन इसका सही उपयोग ही इसे उपयोगी बनाता है। यदि हम इसका प्रयोग ज्ञान, शिक्षा और विकास के लिए करें तथा इसके दुष्प्रभावों से सावधान रहें, तो इंटरनेट मानव जीवन को और अधिक सरल, सुरक्षित एवं समृद्ध बना सकता है। इंटरनेट का सही इस्तेमाल करके मानव अपनी उन्नति कर सकता है।
प्रश्न 12. (क) (i) ‘सज्जनः’ का सन्धि-विच्छेद होगा- (1 अंक)
(a) सत् + जनः
(b) सद् + जन्ः
(c) सज्ज + नः
(d) सज् + जन्ः
(ii) ‘योद्धा’ में कौन-सी सन्धि होगी? (1 अंक )
(a) रुत्व
(b) उत्व
(c) जश्त्व
(d) दीर्घ
(iii) ‘पौ + अकः’ की सन्धि है (1 अंक )
(a) पोअकः
(b) पावकः
(c) पावाकः
(d) पोवाकः
(ख) निम्नलिखित में से किसी एक का विग्रह करके समास का नाम लिखिए। (2 अंक )
(i) घनश्यामः
(ii) नीलोत्पलम
(iii) महाशयः
उत्तर :- (i) घनश्यामः का समास-विग्रह:
समास-विग्रह: घन इव श्यामः
समास का नाम: उपमान कर्मधारय समास
प्रश्न 13. (क) (i) निम्नलिखित में से किसी एक शब्द के धातु एवं प्रत्यय का योग स्पष्ट कीजिए। (1 अंक)
(अ) दातव्यः
(ब) दत्तः
(स) नीतः
उत्तर :- (स) नी (धातु) + क्त (प्रत्यय) = नीतः
(ii) निम्नलिखित में से किसी एक शब्द का प्रत्यय लिखिए। (1 अंक)
(अ) बुद्धिमत्
(ब) लघुत्वम्
(स) कटुता
उत्तर: (ब) लघु + त्व = लघुत्वम्।
(ख) रेखांकित पदों में से किसी एक पद में प्रयुक्त विभक्ति तथा सम्बन्धित नियम का उल्लेख कीजिए। (1+1=2 अंक)
(i) पादेन खञ्जः।
(ii) सः यानेन गच्छति ।
(iii) रामाय नमः।
उत्तर :- रामाय नमः में प्रयुक्त विभक्ति: चतुर्थी विभक्ति है।
नियम: नमःस्वस्तिस्वाहास्वधाऽलम्वषट्योगाच्च योगे चतुर्थी
प्रश्न 14. अपने मित्र को ग्रीष्मावकाश साथ बिताने के लिए आमन्त्रित करते हुए पत्र लिखिए। (2+6=8 अंक)
उत्तर :-
मित्र को ग्रीष्मावकाश साथ बिताने के लिए आमंत्रण-पत्र
स्थान : हरदोई
दिनांक : 31 अगस्त, 2026
प्रिय मित्र राहुल,
सप्रेम नमस्कार!
आशा है कि तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे। मेरी ग्रीष्मावकाश की छुट्टियाँ होने वाली हैं। इस बार मैं चाहती हूँ कि तुम अपनी छुट्टियाँ मेरे साथ बिताने के लिए हमारे घर आओ। यहाँ हम साथ मिलकर खेलेंगे, घूमने जाएँगे तथा मनोरंजन के साथ अपनी पढ़ाई भी करेंगे। मेरे माता-पिता भी तुम्हारे आने से बहुत प्रसन्न होंगे। हम पास के ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थानों की सैर भी करेंगे। तुम्हारे साथ समय बिताने से हमारी मित्रता और भी गहरी होगी।
अतः तुमसे अनुरोध है कि छुट्टियों में अवश्य आना और आने की तिथि पहले बता देना।
शेष मिलने पर।
तुम्हारा प्रिय मित्र
दयानिधी
UP Board Class 12 Hindi Model Paper 2027 आप सभी को कैसा लगा कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।
📚 UP Board Class 12 Hindi के सभी अध्याय देखें → Click Here