UGC Substance Abuse Awareness Course: नशे पर वार-कॉलेजों में शुरू होगा नया कोर्स, सरकार का सकारात्मक पहलू,जानिए क्या-क्या पढ़ेंगे छात्र?

UGC Substance Abuse Awareness Course नशे से विनाश की बढ़ती समस्या के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अर्थात् UGC ने उच्च शिक्षा संस्थानों में UGC Substance Abuse Awareness Course प्रारंभ करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। आयोग ने BA और PG स्तर के छात्रों के लिए “Substance Abuse: Prevention and Management” नाम से एक नया मॉडल पाठ्यक्रम का ड्राफ्ट जारी कर stakeholders से सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित पाठ्यक्रम का मकसद छात्रों के अन्दर जागरूकता, स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।

UGC ने 11 अगस्त को जारी नोटिस में इस ड्राफ्ट पर 15 दिनों के भीतर विचार मांगे गए हैं। लेकिन, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह कोर्स सभी UG और PG बच्चों के लिए अनिवार्य होगा या नहीं। Read more – हल्का सोना के लिए मची अफरा तफरी 

UGC Substance Abuse: Prevention and Management में क्या पढ़ेंगे छात्र?

प्रस्तावित UGC Substance Abuse Awareness Course दो क्रेडिट और कुल 30 घंटे का पाठ्यक्रम होगा। इसमें केवल किताबी पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान के आधार पर गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा।

पाठ्यक्रम में छात्रों को नशे की लत से जुड़े न्यूरोबायोलॉजिकल और मनो–सामाजिक पहलुओं को समझने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही addiction के जोखिम वाले कारकों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कमजोरियों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

पाठ्यक्रम का फोकस केवल नशे की समस्या को पहचानने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके prevention (रोकथाम), counselling(काउंसलिंग), rehabilitation (पुनर्वास) और recovery ( रिकवरी ) जैसे पहलुओं को भी समझाने पर होगा। Read more – चैट जीपीटी एआई से खतरा

छात्रों को नशे की समस्या पहचानने की भी मिलेगी ट्रेनिंग :-

ड्राफ्ट मॉडल पाठ्यक्रम में छात्रों को validated screening tools ( जांचे-परखे स्क्रीनिंग टूल ) के इस्तेमाल की जानकारी देने का प्रस्ताव है। इनकी मदद से संभावित substance या alcohol use ( नशीले पदार्थों या शराब का सेवन ) से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर जानकारी इकट्ठा की जा सकेगी।

इसके अलावा छात्रों को Screening, Brief Intervention and Referral to Treatment (SBIRT) ( स्क्रीनिंग, संक्षिप्त हस्तक्षेप और उपचार के लिए रेफरल (SBIRT) ) के बारे में भी पढ़ाया जाएगा।

पाठ्यक्रम में clinical management, counselling, relapse prevention, rehabilitation और recovery support जैसे विषय भी लिए गए हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को नशे की समस्या को केवल एक सामाजिक मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषय के तौर पर समझने में मदद करना है।

केवल क्लासरूम नहीं, Ground Activities भी होंगी :-

इस प्रस्तावित Substance Abuse Awareness Course India ( भारत में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता कोर्स ) की खास बात इसका practical component है। छात्रों को कम से कम पांच प्रकार की गतिविधियों में शामिल होने का प्रस्ताव रखा गया है।

  1. Rehabilitation centres का दौरा
  2. विशेषज्ञों के साथ बातचीत
  3. NGOs के साथ interaction
  4. Social media awareness campaigns
  5. Ideathons
  6. Survey-based studies

इससे छात्रों को नशे की समस्या को जमीन स्तर पर समझने और समुदाय के साथ मिलकर awareness activities करने का अवसर मिलेगा।

 

NEP 2020 से भी जुड़ा है प्रस्तावित कोर्स :-

UGC के ड्राफ्ट के मुताबिक, इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य healthy lifestyles, mental well-being, life skills और responsible citizenship को बढ़ावा देना है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप तैयार किया गया है।

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त को 100 सप्ताह के “Nasha Mukt Yuva for Viksit Bharat” अभियान की शुरुआत की थी। Read more – भारत ने बनाया कुशा S400 मिसाइल 

क्या सभी ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए अनिवार्य होगा? :-

फिलहाल यह साफ नहीं है कि UGC के नोटिस में कहा गया है कि यह कोर्स higher education institutions में course offerings के हिस्से के तौर पर “may also be introduced” किया जा सकता है।

लेकिन अभी यह कहना थोड़ा जल्दबाजी होगी कि देशभर के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रत्येक UG और PG छात्र के लिए यह कोर्स अनिवार्य होगा।

UGC Substance Abuse Awareness Course क्यों है अहम?

नशे से जुड़ी बड़ी समस्या का असर केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य पर नहीं पड़ता, बल्कि समाज पर भी पड़ता है। उसकी पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य, परिवार और सामाजिक जीवन पर भी पड़ सकता है। ऐसे में कॉलेज स्तर पर ऐसे पाठ्यक्रम को चलाकर छात्रों को शुरुआती स्तर पर जोखिमों को समझने में मदद मिल सकती है।

प्रस्तावित UGC Substance Abuse Awareness Course की खासियत यही है कि इसमें awareness के साथ screening, counselling, rehabilitation और community engagement को भी शामिल किया गया है।

फिलहाल, यह अभी UGC ने सुझाव मांगे हैं, इसलिए अंतिम पाठ्यक्रम में बदलाव संभव है।

भारत सरकार की नीतियों को लेकर के कुछ प्रश्न चिन्ह खड़े होते हैं :-

  • जब हम नीतियों की बात करते हैं तो कुछ राज्य ऐसे हैं जिनकी अर्थव्यवस्था लगभग नशे के कारोबार से ही स्थिर है।
  • ऐसे राज्यों को इस कारोबार से हटकर के किसी दूसरे स्थाई कारोबार पर आश्रित होना पड़ेगा।
    एक तरफ सरकार बड़े-बड़े शराब टेंडर निकलवाती है।
  • गांव गांव हर छोटे बड़े बाजारों में दुकान खोलने की होड़ लगी है ।जिससे सरकार को अच्छी खासी आमदनी होती है।
  • एक तरफ नशे का व्यापार को लेकर सरकार ज़िले स्तर तक टेंडर निकलवाती है और धन एकत्रित करती है।
  • दूसरी तरफ नशे को रोकने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाती है और उस योजना पर धन खर्च करती है।
  • आजकल फिल्मों में खलनायक बिना धुआंधक्कड़ के खलनायक ही नहीं दीखते, जिसको नई पीढ़ी देखकर आत्मसात करती है।
  • ऐसे चलचित्र को देखकर के युवा इसे अपनी प्रतिष्ठा बना लेता है।
  • बात जब गुटखा की होती है तो इसका एक मजेदार पहलू है जब पान मसाला और तंबाकू एक में था, तो लोगों को नुकसान करता था। लेकिन अब पान मसाला और तंबाकू अलग-अलग हो गया तो अब नुकसान नहीं करेगा। ऐसी नीति बनाने वालों को कठोर दण्ड का प्रावधान होना चाहिए।
  • ऐसे बहुत सारे तथ्य हैं जिस पर सरकार को चिंतन करना चाहिए और कड़े फैसले लेने चाहिए।

 

Conclusion : UGC Substance Abuse Awareness Course

UGC Substance Abuse Awareness Course के जरिए विश्वविद्यालयों में नशे की रोकथाम और जागरूकता को academic framework का हिस्सा बनाने की तैयारी है। प्रस्तावित 30 घंटे के कोर्स में addiction, mental health, screening, counselling, rehabilitation और community engagement जैसे विषय शामिल हैं।

फिलहाल यह पाठ्यक्रम कब लागू किया जाएगा इसका स्वरूप क्या होगा किन कक्षाओं के लिए होगा यह कह पाना अभी मुश्किल है। फिर भी हमें भविष्य में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए खासकर ऐसी समस्याएं जो युवाओं के अंदर भटकाव लाये।

कोई सुझाव हो तो अपने विचार कमेंट में लिखें।

हमारे लेख को पढ़ने के लिए विशेष आभार – धन्यवाद। 

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